गॉडफादर कौन?’— राजेश शर्मा को लगातार प्रमोशन मिलने पर उठे राजनीतिक सवाल

‘

रमेश ठाकुर , बिहार
भरत तिवारी हत्याकांड की जांच के बीच पुलिस अधिकारी राजेश शर्मा को लेकर एक बार फिर पुराने मामलों की चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर उनके खिलाफ सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि वर्ष 2007 में मुजफ्फरपुर में तीन भूमिहार युवकों के कथित फर्जी एनकाउंटर के दौरान राजेश शर्मा सदर थाना के थानाध्यक्ष थे।

आरोपों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा कराई गई सीआईडी जांच में पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दी गई थी, लेकिन मृतकों में से एक की मां अनीता देवी ने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। बताया जा रहा है कि यह मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।

इसी बीच यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि मामले के लंबित रहने के बावजूद राजेश शर्मा को लगातार पदोन्नति मिलती रही और वे थानाध्यक्ष से एसडीपीओ के पद तक पहुंचे। इसे लेकर सवाल उठाते हुए कुछ लोगों ने सरकार से पूछा है कि आखिर किन आधारों पर उन्हें लगातार प्रमोशन दिया गया।

भरत तिवारी हत्याकांड के संदर्भ में भी सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि राजेश शर्मा की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि “आखिर ऐसा कौन-सा प्रभावशाली संरक्षण या पैरवी है, जिसके कारण राजेश शर्मा को लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और पदोन्नति मिलती रही? उनके कथित ‘गॉडफादर’ कौन हैं?”

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और राजेश शर्मा या संबंधित सरकारी विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button