उगते सूर्य को अर्घ्य देकर लोकआस्था का पर्व छठ का समापन
अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: आज छठ पूजा का आखिरी दिन है। आज के दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा का समापन किया गया। देश-दुनिया में लोक आस्था के छठ महापर्व के चौथे दिन आज बुधवार की सुबह छठ व्रतियों के उगते सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के साथ ही समापन हो गया।
बेटी मांगने वाला एकमात्र पर्व: ‘रुनकी-झुनकी बेटी मांगिला, पढ़ल पंडितवा दामाद…हो छठी मईया, तोहर महिमा अपरमपार’।
भारत में जहां बेटों के जन्म पर सोहर गाया जाता है, जहां पितृसत्तात्मक समाज है वहां एकमात्र यह पर्व है जिसमें व्रती छठी मईया से बेटी मांगती हैं।
सिलीगुड़ी में गृहिणी श्वेता बताती हैं कि छठ के एक गीत में व्रती कहती है कि हे छठी मईया मुझे बेटी देना ताकि वह मेरी सेवा कर सके। जहां समाज बेटों से अपेक्षा करता है कि वो माता-पिता की सेवा करें वहीं छठ पर्व में बेटी से सेवा कराने की बात होती है। यह अपने आप में बहुत प्रोग्रेसिव सोच है। जिन परिवारों में बेटियां जन्म नहीं ले रहीं, वहां लोग बेटी की चाहत के साथ मन्नत मांगते हैं। छठी मईया से मांगते हैं कि बेटी होगी तो छठ करेंगे। अब तो बेटियों की नौकरी के लिए माएं छठ करती हैं। बेटी की नौकरी हो जाए तो इतने साल छठ करेंगे या उसके लिए सूप चढ़ाएंगे। बेटी ही नहीं, व्रती छठी मईया से पढ़े-लिखे बुद्धिमान दामाद भी मांगती हैं।
बेटियों के नाम पर दउरा में रखते सूप छठ महापर्व में बेटियों की खुशियां, उनकी सलामती और दिन-दूनी रात चौगनी तरक्की की प्रार्थना होती है। इसलिए बेटियों के नाम पर सूप रखे जाते हैं। दउरा में बांस के बने कई सूप रखे जाते हैं। कोई एक सूप, दो सूप, पांच सूप तो कोई 7 या 9 सूप से अर्घ्य देता है। इन सूप में एक सूप लड़कियों के लिए भी होता है। इसे ‘सुपती’ कहा जाता है।



