मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोने की झाड़ू से साफ किया रास्ता, खींची इस्कॉन रथ की रस्सी  

 

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद आज महानगर कोलकाता में पहली बार एक नए राजनीतिक और धार्मिक अध्याय की शुरुआत हुई। अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा आयोजित 55वें ऐतिहासिक कोलकाता रथयात्रा महोत्सव का उद्घाटन आज राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा किया गया। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए कोलकाता की सड़कों पर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

 मुख्यमंत्री ने निभाई ‘चेरा पंहरा’ की पारंपरिक रस्मतय कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर करीब 11:45 बजे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अल्बर्ट रोड स्थित इस्कॉन मंदिर पहुंचे। उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा जी के विग्रहों के दर्शन किए और विशेष आरती उतारी। इसके बाद, पुरी के राजा की तरह पारंपरिक भारतीय संस्कृति का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री ने सोने की झाड़ू से रथ के सामने के मार्ग की सफाई (चेरा पंहरा) की। इसके बाद उन्होंने पवित्र रस्सी खींचकर रथयात्रा का आधिकारिक शुभारंभ किया। बदली परंपरा: पहली बार शामिल हुए शुभेंदु अधिकारीकोलकाता इस्कॉन की रथयात्रा के इतिहास में यह एक बड़ा बदलाव है। साल 2011 से लगातार पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस रथयात्रा का उद्घाटन करती आ रही थीं, लेकिन राज्य में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी पहली बार इस महाउत्सव के मुख्य अतिथि बने। इस दौरान इस्कॉन कोलकाता के अध्यक्ष दयाराम दास सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। रूस, अमेरिका और चीन के भक्तों का अनूठा संगमइस वर्ष कोलकाता इस्कॉन की रथयात्रा वैश्विक शांति और सद्भाव का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। अमेरिका, रूस, यूक्रेन, चीन और ऑस्ट्रेलिया सहित एक दर्जन से अधिक देशों से आए सैकड़ों विदेशी इस्कॉन भक्त पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में मृदंग और झांझ की थाप पर झूमते और हरिनाम संकीर्तन करते नजर आए। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सजेगा तिरुपति शैली का पंडालइस्कॉन मंदिर से रवाना होकर तीनों भव्य रथ हंगरफोर्ड स्ट्रीट, ए.जे.सी. बोस रोड, सरत बोस रोड, हाजरा रोड और जे.एल. नेहरू रोड होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड (मैदान) स्थित मौसी बाड़ी पहुंचे। इस बार मैदान में भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर (गुंडीचा मंदिर) तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर की वास्तुकला की थीम पर तैयार किया गया है। भगवान अगले 7 दिनों तक यहीं विराजमान रहेंगे, जहाँ भक्तों के लिए विशेष दक्षिण भारतीय और पारंपरिक 56 भोग महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिहाज से कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.

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