पीएम ने भोगापुरम हवाई अड्डे का किया उद्घाटन
-डिजाइन आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित
विशेष प्रतिनिधि
भोगापुरम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगापुरम में बने अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। इस हवाई अड्डे के निर्माण पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इस आधुनिक हवाई अड्डे को पूरे उत्तर आंध्र क्षेत्र के विकास के लिए बहुत अहम मान रही है।
सुबह करीब 11 बजे प्रधानमंत्री ने हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद वह राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ हवाई अड्डे का निरीक्षण करने पहुंचे। इसके बाद प्रधानमंत्री खुली छत वाले वाहन से जनसभा स्थल पहुंचे। वहां जनजातीय समुदाय की 13,500 से अधिक महिलाओं और छात्र.छात्राओं ने ढिमसा नृत्य करके उनका भव्य स्वागत किया।
सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस हवाई अड्डे की योजना उद्योगों के विकास, रोजगार बढ़ाने, निर्यात, कौशल विकास और शोध को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। हवाई अड्डे के पहले चरण में हर साल 60 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर 4 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष करने की योजना भी तैयार की गई है।
प्रेस सूचना ब्यूरो ;पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, इस हवाई अड्डे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ;एआई, बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग ;बीआईएम, एयरसाइड 4.0 तकनीक, एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर ;एपीओसी और बायोमेट्रिक यात्री प्रक्रिया जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
हवाई अड्डे का डिजाइन आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल की छत की बनावट पारंपरिक चुट्टिलु झोपड़ियों और अराकू घाटी के प्राकृतिक दृश्यों से प्रेरित है। इसकी लहरदार आकृति उड़ती हुई मछली की सुंदर चाल को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी आज राज्य में करीब 18 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और कई नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे।
वह विशाखापत्तनम में 460 करोड़ रुपये की लागत वाली एएसआईपी सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना को एएसआईपी टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और दक्षिण कोरिया की एपीएसीटी की साझेदारी में बनाया जा रहा है। यह आंध्र प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई होगी, जिसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूरी मिली है। यहां हर साल करीब 9.6 करोड़ सेमीकंडक्टर चिप बनाई जाएंगी। इससे सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े अन्य छोटे और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।




