शिक्षिका, लेखिका और कवयित्री दीपा विरमानी का साक्षात्कार।
साहित्य:साक्षात्कार
प्रस्तुति: राजीव कुमार झा
“विद्यालय पत्रिका का संपादन और साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेना भी मुझे अच्छा लगता है।”
1. आप हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कविताएं लिखती हैं। इन दोनों भाषाओं से आपका कैसा रिश्ता है?
दोनों भाषाओं से मेरा आत्मीय रिश्ता है। अंग्रेजी मुझे विचारों को अलग दृष्टि से व्यक्त करने का अवसर देती है, जबकि हिन्दी मेरे मन और भावनाओं के अधिक करीब है। मेरे लिए भाषा से अधिक महत्वपूर्ण वह भाव है, जिसे मैं व्यक्त करना चाहती हूं।
2. हिन्दी और अंग्रेजी में से किस भाषा में कविता लिखना आपको अधिक प्रिय है?
हिन्दी में लिखना मुझे थोड़ा अधिक सहज लगता है। हिन्दी में भाव बहुत स्वाभाविक रूप से शब्दों में उतर आते हैं। हालांकि कई बार कोई विचार अंग्रेजी में अधिक सहजता से आता है, इसलिए मैं भाषा तय करके नहीं लिखती—भाव जिस भाषा में आता है, कविता उसी में लिखती हूं।
3. कविता लेखन कब शुरू किया और इसकी प्रेरणा क्या रही?
साहित्य और कविता के प्रति आकर्षण बचपन से रहा, लेकिन जीवन के अनुभवों ने इसे धीरे-धीरे गंभीर अभिव्यक्ति का रूप दिया। रिश्ते, प्रकृति, समाज और रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाएं मुझे प्रभावित करती हैं। जब कोई भाव भीतर ठहर जाता है, तो वह अक्सर कविता बनकर बाहर आता है।
4. क्या आप अपनी कविताएं सोशल मीडिया पर भी साझा करती हैं? सोशल मीडिया ने साहित्य को कितना प्रभावित किया है?
जी हां, मैं फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी कविताएं साझा करती हूं। सोशल मीडिया ने साहित्य को पाठकों तक पहुंचाने का दायरा बहुत बढ़ाया है और नई पीढ़ी को भी लिखने-पढ़ने का मंच दिया है। हालांकि लोकप्रियता और साहित्यिक गुणवत्ता अलग बातें हैं। अच्छी रचना की असली पहचान समय के साथ होती है।
5. अपने परिवार, शिक्षा और नौकरी के बारे में कुछ बताइए।
मेरे माता-पिता से मिले संस्कार मेरे व्यक्तित्व की नींव हैं। मेरी शिक्षक-यात्रा वर्ष 2011 में केंद्रीय विद्यालय वायु सेना स्थल बरेली से शुरू हुई। विभिन्न संस्थानों में कार्य करने के बाद वर्ष 2015 में KVS से जुड़ी और वर्ष 2016 से केंद्रीय विद्यालय वायु सेना स्थल बरेली में कार्यरत हूं। परिवार, अध्यापन और साहित्य—ये तीनों मेरे जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं और एक-दूसरे को समृद्ध करते हैं।
6. आपके प्रिय कवि और लेखक कौन हैं?
महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, हरिवंश राय बच्चन और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ मुझे विशेष रूप से प्रिय हैं। कबीर की सहजता और उनकी जीवन-दृष्टि भी मुझे बहुत प्रभावित करती है। मुझे ऐसा साहित्य पसंद है जो संवेदना के साथ जीवन को समझने की दृष्टि भी दे।
7. कविता के अलावा आपकी और किन कार्यों में रुचि है?
अध्यापन मेरी सबसे बड़ी रुचि है। इसके अलावा मंच संचालन, कहानी-कथन, कविता-पाठ, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ना मुझे पसंद है। विद्यालय की पत्रिका के संपादन और साहित्यिक कार्यक्रमों में भाग लेना भी मुझे अच्छा लगता है। मेरे लिए अध्यापन और साहित्य, दोनों ही मनुष्य और जीवन को समझने के माध्यम हैं।


