सीमा पर देश की रक्षा, बाढ़ में मानवता की सेवा: असम के पीड़ितों के लिए मसीहा बने सेना के जवान शक्ति पाल
### *सिलीगुड़ी के सैनिक और उनकी पत्नी ने पहुंचाई राहत, 90 गैस सिलेंडर-बर्नर समेत जरूरी सामग्री वितरित*
*अजीत प्रसाद, सिलीगुड़ी।* भारतीय सेना के जवान शक्ति पाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सैनिक का दायित्व केवल देश की सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि संकट की घड़ी में मानवता की सेवा भी उसकी पहचान होती है। असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की पीड़ा को देखकर सिलीगुड़ी निवासी शक्ति पाल अपनी पत्नी गीतिका पाल के साथ राहत सामग्री लेकर प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और जरूरतमंद परिवारों की हरसंभव मदद की।
राहत अभियान के पहले चरण में दंपती ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच राशन, पीने का पानी, दवाइयां, कपड़े और बर्तन जैसी आवश्यक सामग्री का वितरण किया। राहत कार्य के दौरान उन्हें पता चला कि अधिकांश परिवारों के पास भोजन तो है, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस और ईंधन उपलब्ध नहीं है। इसके बाद उन्होंने दूसरे चरण में जरूरत के अनुरूप राहत पहुंचाने का निर्णय लिया।
दूसरे चरण में शिवसागर से करीब 30 किलोमीटर दूर निमाईजान, नाजिरा और लिगरीपुकुरी क्षेत्रों के 90 जरूरतमंद परिवारों को गैस सिलेंडर और गैस बर्नर उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा नए कपड़े, चप्पलें, बर्तन और अन्य आवश्यक घरेलू सामग्री भी वितरित की गई। समय पर मिली इस सहायता से बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिली।
शक्ति पाल और उनकी पत्नी गीतिका पाल ‘यूनिक फाउंडेशन’ नामक स्वयंसेवी संस्था का संचालन भी करते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी संस्था का प्रचार नहीं, बल्कि बाढ़ से प्रभावित लोगों तक उनकी सबसे जरूरी जरूरतें पहुंचाना था। इस मानवीय पहल से प्रेरित होकर उत्तर बंगाल के कई लोग भी राहत कार्य में सहयोग के लिए आगे आए। किसी ने आर्थिक सहायता दी तो किसी ने राहत सामग्री उपलब्ध कराई।
शक्ति पाल और गीतिका पाल की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सेवा और संवेदनशीलता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। सीमाओं पर देश की सुरक्षा करने वाला सैनिक जब आपदा के समय आम लोगों के बीच खड़ा होता है, तो वह केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि उम्मीद और मानवता का प्रतीक बन जाता है।




