श्रीकृष्ण की बहन माँ योगमाया का दरबार भव्य रूप से सजाया गया- शृंगारी मनीष द्विवेदी जी महाराज
रिपोर्ट: अजीत चौबे
आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर माँ योगमाया का दरबार भव्य रूप से सजाया गया। भक्तों के लिए यह दिन विशेष रहा, क्योंकि माँ अष्टभुजा को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बहन के रूप में भी पूजा जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उसी समय माता यशोदा के यहाँ एक कन्या ने जन्म लिया। वसुदेव जी श्रीकृष्ण को गोकुल ले गए और वहाँ से उस कन्या को लेकर मथुरा लौट आए।
कंस ने जब उस कन्या को देवकी की आठवीं संतान समझकर उसे धरती पर पटकना चाहा, तब वह कन्या उसके हाथ से छूटकर आकाश में प्रकट हुईं। उन्होंने कंस से कहा—
“हे कंस! तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है और वह गोकुल में सुरक्षित है।”
यही दिव्य शक्ति माँ योगमाया/ माँ अष्टभुजा के रूप में पूजित हुईं।
आज जन्माष्टमी के पावन दिन माँ के दरबार में विशेष शृंगार किया गया। माँ का मनमोहक शृंगार शृंगारी मनीष जी महाराज ने श्रद्धा और भक्ति के साथ किया। फूलों, आभूषणों और दिव्य वस्त्रों से सजे माँ के स्वरूप ने पूरे दरबार को भक्तिमय बना दिया।



