भगवान विश्वकर्मा की पूजा और उनकी कृपा!
धर्म अध्यात्म :पर्व त्योहार
राजीव कुमार झा
हिंदू धर्म में कई देवी देवताओं का पूजन होता है। वैदिक काल में प्रकृति की विभिन्न शक्तियों की पूजा देवी देवताओं के रूप में की जाती थी। कालांतर में सभ्यता संस्कृति के विकास के साथ कर्मकांड का स्वरूप बदलने से अन्य प्रकार के देवी-देवता का भी आविर्भाव हिंदू धर्म में हुआ। भगवान विश्वकर्मा का नाम इन देवी देवताओं में प्रमुख है। विश्वकर्मा को सृष्टि का शिल्पकार माना जाता है और उनको इंद्रपुरी यानी देवलोक की राजधानी का शिल्पकार कहा जाता है। विश्वकर्मा के बारे में यह भी कहा जाता है कि उनकी कृपा से ही अभियांत्रिकी और तकनीक का भी विकास हुआ। मनुष्य के जीवन की सुख सुविधा के लिए जो अनेकानेक प्रकार के औजार मशीनों और यंत्रों का धरती पर विकास हुआ, यह सब भगवान विश्वकर्मा की कृपा से ही साकार हुआ। इस प्रकार विश्वकर्मा धरती पर विभिन्न प्रकार के उद्योग धंधों के जनक हैं। विश्वकर्मा को वास्तुशास्त्र का सर्जक भी माना जाता है। आज विश्वकर्मा पूजा है। सारे देश में यह त्योहार मनाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा की जय हो! वह संसार का कल्याण करें। नयी तकनीकी और नयी अभियांत्रिकी से ही संसार का कल्याण और मनुष्य के जीवन का सतत् उत्थान होगा। यह विश्वकर्मा की संतुष्टि और उनके वरदान से ही संभव होगा। विश्वकर्मा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने ही सोने की लंका बनाई थी जिसे रावण ने देवताओं से छीन लिया था। इंद्रप्रस्थ जो पांडवों की राजधानी थी, विश्वकर्मा को इसका भी निर्माता कहा जाता है।




