मध्य प्रदेश के हरदा के कवि जयकृष्ण चांडक ‘ जय’ से राजीव कुमार झा की संक्षिप्त बातचीत…

साक्षात्कार: साहित्य

कवि को मंच पर शालीन शिष्ट रहते हुए संयमित काव्यपाठ करना चाहिए…

प्रश्न: ग़ज़ल इश्क मुहब्बत की शायरी मानी जाती है लेकिन अब हिंदी में इसका लेखन अलग अंदाज में भी हो रहा है।
इस बारे में आपका क्या ख्याल है?

उत्तर : यकीनन ग़ज़ल को हमेशा मुहब्बत से जोड़कर ही देखा जाता रहा है पर साहित्य में ग़ज़ल ही एकमात्र ऐसी विधा है जो ज़िंदगी, दुनिया, आसपास का माहौल, दर्द, खुशी और हालाते हाज़रा को एक साथ लेकर चलती है।

प्रश्न: अपने घर परिवार के बारे में बताइए?

उत्तर :मैं हरदा मध्य प्रदेश का निवासी हूं। परिवार में मुझे मिलाकर कुल छह लोग हैं। मां, पत्नी दो बेटे एक बहू ।
मेरी कृषि उपकरण निर्माण की यूनिट है। बड़ा बेटा और बहू दोनों चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। छोटे बेटे की वुडन क्राफ्ट एवं गिफ्ट आइटम्स की फैक्ट्री है।

प्रश्न:कवियों को मंच पर कविता पाठ किस तरह करना चाहिए?

उत्तर: जी ,कवि सम्मेलन सुन- सुनकर ही लिखने का शौक लगा। मैं भी मंचों पर जाता हूं। देशभर में अब तक छोटे – बड़े मिलाकर लगभग सौ के करीब मंचों पर काव्यपाठ कर चुका हूं। कवि को मंच पर शालीन, शिष्ट रहते हुए संयमित काव्यपाठ करना चाहिए। मेरा ऐसा मानना है

प्रश्न: आपने किन शायरों को पढ़ा है?

उत्तर : सही कहूं तो किसी भी कवि या शायर को बहुत ज़्यादा नहीं पढ़ा। हालांकि विधान में ग़ज़ल कहना बड़ा मुश्किल होता है । मैं भी अपनी अधिकतर ग़ज़लें गुनगुनाकर ही कहता हूं , बाद में तकनीकी रूप से संशोधित कर लेता हूं , विशेषकर छोटी बहरों में ज्यादा काम करता हूं।

प्रश्न:नारियों और बालिकाओं के प्रति समाज में घृणित अपराध निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। इस बारे में आप कहना चाहेंगे?

उत्तर: आज के हालातों के मद्देनजर हमारे समाज में नारियों की स्थिति वाकई में बहुत दयनीय और चिंतनीय है। इस दिशा में हर रचनाकार को अपनी कलम को हथियार बनाकर आगे आना चाहिए। हालात कैसे सुधारें या सुधरें इसपर अपना बेबाक लेखन करना चाहिए।

कवि का संक्षिप्त परिचय

नाम- जयकृष्ण चांडक ‘जय’
पता:
रमण विला चांडक चौराहा हरदा , जिला :हरदा , मध्य प्रदेश -पिन कोड 461331
मोबाइल नंबर 9977168844

अभिरुचि: कविता लेखन के अलावा चित्रकला, मूर्तिकला, गायन, रंगोली, स्केच पेंटिंग आदि।

आध्यात्मिक सेवाएं- मंदिरों में भगवान के श्रृंगार और झांकियां मिलाकर विगत 38 वर्षों में करीब 575 से उपर कलाकृतियों का निर्माण। महज़ शौकिया…
आठ सालों में देशभर में करीब सत्तर मंचों पर काव्यपाठ
दूरदर्शन पर इन्टरव्यू और विभिन्न चैनलों से क‌ई बार काव्य पाठ

*प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह

1.और सफ़र भी आएंगे
2.मुझसे मुझ तक

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