कानपुर में 20 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू : सस्पेंड

विवेचना में नाम निकालने के नाम पर मांगे थे 20000

 

सुनील बाजपेई
कानपुर। पुलिस की रिश्वतखोरी के मामले लगता बढ़ते जा रहे हैं,जिसको लेकर सबसे ज्यादा बदनाम विवेचना अधिकारी सब इंस्पेक्टर हो रहे हैं। ऐसे ही एक दरोगा को विवेचना में नाम निकालने के नाम पर ₹20000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार करने के बाद उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। सूत्रों ने बताया कि इसके तहत दरवाजा को सस्पेंड भी कर दिया गया है। रिश्वतखोरी से पुलिस विभाग की छवि खराब होने का यह मामला पहला नहीं है। इसके पहले भी कई पुलिस कर्मचारी सब इंस्पेक्टर आदि रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया जा चुके हैं।
दरोगा द्वारा रिश्वतखोरी का यह मामला नौबस्ता थाना क्षेत्र का है ,जहां एंटी करप्शन टीम ने तैनात दरोगा को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक पुराने जमीनी विवाद की जांच कर रहे दरोगा अभिनव चौधरी ने एक नामजद आरोपी का नाम हटाने लिए 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। युवक ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की। इसके बाद टीम ने जाल बिछाकर दरोगा को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। उसने रिश्वत देने वाले पीड़ित को श्री राम चौक बुलाया था ,जहां उसे गिरफ्तार करने के लिए एंटी करप्शन की टीम पहले से ही तैयार बैठी थी। घटना के विवरण में बताया गया कि इसी साल 14 जनवरी को नौबस्ता थाने में होजरी कारोबारी त्रिपुरेश मिश्रा ने प्रत्युष कुमार सहित चार लोगों पर जालसाजी और रंगदारी मांगने समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगा कि नौबस्ता के मछरिया में मौजूद पुस्तैनी मकान को प्रत्युष द्वारा कागजों में हेर-फेर करके कब्जा करने का प्रयास किया गया। मामले में नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मुकदमे की विवेचना दरोगा अभिनव चौधरी कर रहे थे। जिसके लिए ही उन्होंने पीड़ित का नाम निकालने के लिए ₹20000 की रिश्वत मांगी थी।

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