आतंकियों ने दो मजदूरों को नाम पूछकर मारी गोली
-अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से सहमे लोग
-कश्मीर में आतंकी वारदात से जम्मू में भी दहशत
भारत पोस्ट संवाददाता
जम्मू। कुलगाम के केलम में आतंकियों ने एक बार फिर टारगेट किलिंग की घटना को अंजाम दिया है। आतंकियों ने दो मजदूरों को नाम पूछकर गोली मारी। दोनों मजदूरों की मौत हो गई है। हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ ने ली है। आइए जानते हैं, कश्मीर में बीते पांच साल में कितनी बार बाहरी लोग आतंकियों का निशाना बने हैं?
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में प्रवासी मजदूर की हत्या कोई अकेली घटना नहीं है। घाटी में आम नागरिकों को चुनकर निशाना बनाने की आतंकियों की रणनीति पिछले कई वर्षों से समय.समय पर सामने आती रही है। शिक्षक, कश्मीरी पंडित, बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी और फिर प्रवासी मजदूर आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। हालिया घटना ने एक बार फिर इस खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हर बड़ी वारदात के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे हुए, लेकिन टारगेट किलिंग की घटनाएं पूरी तरह नहीं थम सकीं। 2022 में ऐसी घटनाएं सबसे ज्यादा देखने को मिलीं, जब सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और प्रवासी मजदूर लगातार आतंकियों के निशाने पर आए। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों मजदूर ईंट भट्ठे के पास ही खड़े थे। अचानक वहां पहुंचे करीब दो आतंकियों ने उन्हें टारगेट करते हुए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी से मौके पर अफरा.तफरी मच गई। साथी मजदूर जब तक कुछ समझ पाते, तब तक दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
आतंकियों ने दीपक के सीने में सीधे गोलियां मारी हैं। इस कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जीएमसी अनंतनाग के डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक खून बहने के कारण दीपक ;24 की मौत हुई है। घायल भूपेंद्र ;28 को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया, यहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। दक्षिण कश्मीर में सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अनंतनाग जिले में एक बड़ा आतंकवादी हमला देखने को मिला था। अनंतनाग में सबसे हालिया आतंकी हमला 22 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे हुआ था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था।
वह हमला दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग शहर के व्यस्त व मुख्य बाजार लाल चौक पर हुआ था। हमले में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात जम्मू.कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी निशाना बने थे। अब इस हमले के बाद दक्षिण कश्मीर में फिर बाहरी मजदूरों पर खतरा गहरा गया है। घटना के बाद पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है। हमलावर आतंकियों को पकड़ने के लिए आसपास के गांवों और जंगलों में बड़े पैमाने पर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
श्रीनगर में आतंकियों ने एक बार फिर अन्य राज्यों के बेकसूर मजदूरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इसका मकसद दहशत फैलाने है। दरअसल, घाटी में बचे.खुचे आतंकी अपनी अंतिम सांसें ले रहे हैं। हड़बड़ाहट में आतंकी ऐसी कायराना हरकतों को अंजाम दे रहे हैं ताकि अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहें। कुलगाम की घटना के बाद से जम्मू में रहने वाले प्रवासी मजदूर भी भयभीत हैं। इससे पहले भी आतंकी बिहार सहित अन्य राज्यों के मजदूरों को निशाना बना चुके हैं। कश्मीर व जम्मू में अधिकांश बाहरी मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब से




