*पिछले 12 सालों से 365 दिन जारी रहता है फी- सबिलिल्लाह हाजियों की खिदमत का सिलसिला.*

शख्सियत : हाजी शकील अहमद, दिल्ली हज मालूमात ग्रुप*

 

नई दिल्ली। पहले हाजियों की वापसी के बाद दो महीने हज के मैदान में काम करने वाले खिदमतगारों को आराम मिल जाया करता था,लेकिन पिछले साल से हाजियों की वतन वापसी का सिलसिला चालू रहता है और इधर अगले साल के लिए हज दरखवास्त शुरू हो जाती हैं, इस साल भी 7 जुलाई से हज-2026 के लिए दरखवास्त शुरू कर दी गईं, फ्लाइट हाजियों को लेकर मदीना एयरपोर्ट से कब उड़ी दिल्ली कब पहुँच रही हे ,हमारे शकील अहमद साहब दिल्ली उतरने वाली हज की फ्लाइट्स की मालूमात देते रहे ,खिदमत अंजाम दे रहे साथियों से लोग ये भी पूछ रहे हे हज -2026 के फार्म भरने कब आ जाएँ,आपके पास, 2025 के आने वाले और 2026 में जाने वाले हाजी लोगों के बीच का वक्फ़ा अब बहुत कम रह गया।
एक ज़बरदस्त खिदमतगार *शकील अहमद* जो दिल्ली से हैं, साल भर उनकी खिदमत का सिलसिला चलता ही रहता है, दिन में शायद खाना खाते वक़्त भी कुछ न कुछ हज से मुताल्लिक मालूमात वो देते रहते होंगे यक़ीनन,हैरत की बात यह कि शकील भाई का मोबाईल कभी स्विच ऑफ नहीं मिलता बल्कि रात 12 बजे भी वो ऑन लाईन नज़र आते हैं, कोई सवाल करे फौरन उसका जवाब शकील भाई हाज़िर कर देते हैं, बड़ी बात यह कि मैंने महसूस किया कभी किसी भी काम में टाल-मटोल नहीं करते, 2023 में मुझे हज मंत्रालय का एक काम पड़ गया, हमारे ज़िले के हाजी साहब के एक मैटर पर मंत्रालय के ज़िम्मेदार से बात करनी थी, मैंने शकील भाई को सुबह अपनी बात बताई वो 11 बजे मंत्रालय पहुँच भी गए और ज़िम्मेदार मुलाज़िम से मेरी बात भी करवा दी. मुझे बहुत देर तक ताज्जुब होता रहा, पहले तो दिल्ली इतना बड़ा शहर है ऊपर से मंत्रालय पहुँचना और शकील भाई वहाँ पहुँच भी गए।
जोधपुर (राज.) में हज वेलफेयर सोसायटी की नेशनल कांन्फ्रेंस में पहली बार हमारी मुलाक़ात शकील भाई से हुई थी, दिल्ली हज मालूमात के वो सर्वे सर्वा हैं और हिंदुस्तान के किसी भी सूबे से जाने वाले हाजियों को हर तरह की मालूमात वह व्हाट्सअप ग्रुपों और सोश्यल मीडिया के दीगर प्लेटफार्म के ज़रिये देते रहते हैं यह बात तो पता थी, साथ ही मालूमात देने के अलावा हाजियों को हज के दौरान कोई दिक्क़त पेश आए तो उसे हल करने के लिए अपनी सतह पर भरपूर कोशिश करते हैं यह भी जानकारी थी, हम सोच रहै थे काश शकील भाई जैसा एक्टिव शख़्स हज वेलफेयर सोसायटी की ज़िम्मेदारी भी संभाल ले तो हमारा दिल्ली में सोसायटी क़ायम करने की टेंशन खत्म हो जाए, शायद दुआ की कुबूलियत का वक़्त रहा होगा, कांन्फ्रेंस के बाद जब हम अपने शहर वापस हुए दो-तीन दिन बाद जोधपुर ज़िला इकाई के सदर *हाजी सैय्यद आरिफ अली साहब* ने दिल्ली में हज वेलफेयर सोसायटी के सुबाई सदर के लिए शकील अहमद के नाम की तजवीज़ ऱख दी, फिर क्या था एक पल गवाएं हमने अपनी नेशनल टीम से मशवरा कर रज़ामंदी दे दी,
शकील भाई के साथ हमने अब तक दिल्ली में सोसायटी के बैनर तले दो प्रोग्राम कर लिए, पहली बार जब हमने उनकी दिल्ली टीम से मुलाक़ात की, टीम के एक-एक शख़्स से मिलकर बड़ा फख्र हुआ और बेइंतिहा ख़ुशी, एक ज़माने से सभी लोग हाजियों की बेलौस खिदमत में जुटे हैं, तरबियत कैम्प जगह-जगह मुनअकिद कर हाजियों की बेहतरीन रहनुमाई करते हैं, हज दरखवास्त से शुरू सिलसिला हज सफ़र की रवानगी तक चलता है बल्कि जब हाजी साहेबान सऊदी अरब पहुँच जाते हैं टीम दिल्ली के साथी उनसे राबते में रहते हैं, उनकी यहॉं रहकर वहाँ भी रहनुमाई करते हैं।
मोहम्मद असलम, नसीमउद्दीन, जनाब मोहम्मद हनीफ, जनाब मोहम्मद ज़ाहिद,जनाब फय्याज़ उद्दीन, जनाब खिज़र हयात, जनाब मोहम्मद नफीस, जनाब मोहम्मद असद मियाँ, जनाब अब्दुल साजिद, जनाब गुलज़ार अहमद, जनाब मौलाना सैय्यद मुहम्मद मुनाज़िर, जनाब जाने आलम, जनाब बुरहान करीम, जनाब इरशाद, जनाब अनस, जनाब शाहरुख़, जनाब इमरान, जनाब इरफ़ान, जनाब शीबू, जनाब शफीक वगैरह ऐसी नायाब शख्सियतें हैं जो शकील भाई के साथ कांधे से कांधा मिलाकर काम कर रहै हैं, इनकी अपनी भी तंज़िमें हैं लेकिन मकसद सभी तंज़िमों का एक ही है आज़मीन-ए-हज की खिदमत इसलिए कभी आपस में कोई इंतेशार नहीं होता, सभी लोग मिलजुलकर हाजियों की खिदमत में दिन-रात लगे रहते हैं,
दुआ है अल्लाह शकील भाई और उनकी पूरी टीम को, हज मालूमात ग्रुप, हज वेलफेयर सोसायटी और दीगर तंज़िमों से जुड़कर अपनी बेहतरीन खिदमात अंजाम दे रहै सभी साथियों को खूब जज़ाए खैर दे, सभी को बार बार हज की सआदत हासिल हो, उनकी नस्लों से भी अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त खिदमत के काम लेता रहै।

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