10 साल बाद फिर से हिंदी विभाग ने ‘डाॅक्टर नगेंद्र स्मृति व्याख्यानमाला’ शुरू

नई दि‍ल्‍ली 10 साल बाद फिर से हिंदी विभाग ने ‘डाॅक्टर नगेंद्र स्मृति व्याख्यानमाला’ शुरू किया है।आगामी 19 और 20 अगस्त को हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के ओर से ‘डाॅक्टर नगेंद्र स्मृति व्याख्यानमाला’ के अंतर्गत दो दिवसीय व्याख्यान हो रहा है। डाॅ. नगेंद्र ने हिंदी साहित्य तथा आलोचना को प्रखर बनाने में एक अहम भूमिका निभाई है। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग को एक शिखर तक पहुँचाया है। यह कार्यक्रम उन्हें याद करते हुए संपूर्ण हिंदी विभाग करवा रहा है। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर चौथे सप्तक के महत्वपूर्ण कवि नंदकिशोर आचार्य आ रहे हैं। ‘छीलते हुए अपने को’ और ‘साहित्य का स्वभाव’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक लिखने वाले नंदकिशोर आचार्य कार्यक्रम में अपने विचार रखेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह हैं। साथ ही विशेष उपस्थिति के तौर पर अधिष्ठाता महाविद्यालय प्रो. बलराम पाणि तथा दक्षिणी परिसर के निदेशक प्रो. रजनी अब्बी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष अनूप लाठर भी आ रहे हैं।

प्रथम दिवस की शुरुआत 19 अगस्त अपराह्य 2 बजे से है। कार्यक्रम का स्थान दिल्ली विश्वविद्यालय का सत्यकाम भवन, उत्तरी परिसर है। कार्यक्रम के प्रथम दिवस का विषय ‘रस की बुनियादी अवधारणा’ है, मुख्य वक्ता नंदकिशोर आचार्य अपने ज्ञान से हमें सराबोर करेंगे। द्वितीय दिवस की शुरुआत भी अपराह्न 2 बजे से है, तथा विषय ‘रस की समकालीनता’ है। दूसरे दिन के आलोक में विशेष उपस्थिति छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी की है। नंदकिशोर आचार्य दूसरे दिन अपने विचार रखने के उपरांत प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के साथ बातचीत करेंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग को बहुत खुशी होगी यदि आप इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे तथा होने वाले बातचीत में शामिल होंगे।

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