सिलीगुड़ी सहित उत्तर बंगाल में ईडी की नजर धान खरीद के नाम पर लुट पर
पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्तर पर राशन वितरण के नाम पर किसानों से धान खरीद में धांधली की होगी जांच
विधानसभा चुनाव के पहले कई मिल मालिकों पर कसेगा शिकंजा,- बिहार से भी जुड़ता दिख रहा है यह पूरा मामला
सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी में लगातार दो बार ईडी की छापामारी से आर्थिक लेनदेन की गड़बड़ी और एस्टेट से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ था। इसी बीच जानकारी मिल रही है कि ईडी यही चुप नहीं बैठने वाली। विधानसभा चुनाव के पहले एक बार फिर ईडी राशन वितरण घोटाला सह धान खरीद के नाम पर उत्तर बंगाल में मची लुट की जांच में जुट सकती है। नाम भी सामने आया है परन्तु उसे उजागर नहीं किया जा सकता। इसमें पिछले पांच साल के धान खरीद और मिल मालिकों द्वारा तैयार कर चावल दिए की जांच भी की जा सकती है। इतना ही नहीं बिहार में धान के बदले चावल नहीं देने का मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से गर्मा गया है। करोड़ों रुपये के धान का भुगतान नहीं करने वाले मिलरों पर कार्रवाई की जानी है लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि धान फर्जी मिलों को दिया गया है। ऐसे में मिल और धान गायब हैं। इससे चुनावी साल में सरकार की टेंशन बढ़ गई है। कई मिलों को जा रहे वारंट यह कहते हुए वापस आ रहे कि इसका पता फर्जी है। बिहार राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक की रिपोर्ट के अनुसार बंगाल की एमएम एग्रो टेक, सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग) को 1303 मीट्रिक टन धान दिया गया था। इस मिल से एक ग्राम चावल भी सरकार को सीएमआर के रूप में नहीं मिला। इस मिल से दो करोड़ 82 लाख रुपये की वसूली की जानी है। मिल मालिक के रूप में राजेश विहानी दर्ज है। गिरफ्तारी वारंट भी जारी है, मगर पता फर्जी बताया जा रहा है। बंगाल की ही रायगंज फूड प्रो. प्रालि को सबसे अधिक 3683.672 मीट्रिक टन धान दिए गए। यहां से भी एक ग्राम चावल वापस नहीं मिला। अब इस मिल से लगभग आठ करोड़ रुपये की वसूली के लिए पदाधिकारी माथापच्ची कर रहे हैं। उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज के संजय भौमिक के नाम से मिल है। यहां की भी वही कहानी है। इस तरह इन दो मिलों से 10 करोड़ की वसूली इसलिए भी नहीं हो पा रही क्योंकि इनके अस्तित्व का ही पता नहीं चल पा रहा है। बंगाल में धान खरीद में उत्तर बंगाल के ज्यादातर जिले के किसानों के बैंक एकाउंट वहा के बैंको में नहीं खोल सिलीगुड़ी के बंधन बैंक, आइसीआइअई बैंक, एचडीआईसी बैंक, एक्सिस बैंक में फर्जी तरीके से खोले जाने की शिकायतें मिली है। कहा गया है कि जो किसान जहां के होंगे उसका खाता तो वहीं खोला जाना चाहिए? लेकिन ऐसा नहीं होता। कागज में किसानों के धान खरीद दिखाकर उनके नाम पर भुगतान मिल मालिकों द्वारा अधिकारियों के सांठ-गांठ से ले लिए जाने का भी आरोप है। जांच के दायरे में दार्जिलिंग जिला रायगंज,अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार के किसानों नाम पर झूठी और फर्जी अकाउंट खोले जाने की बात सामने आ रही है। ईडी बैंक में लगे सीसीटीवी फुटेज के साथ मास्टर रोल की जाच कर सकती है। आरोप है कि डिस्ट्रिक कंट्रोलर मिल मालिकों से प्रति क्विंटल 150 रुपये लेकर किसानों का नहीं बल्कि दलालों से धान खरीद की गयी धान के बदले बिहार से आने वाले चावल को मिल मालिकों के मिल में तैयार चावल बता गोदाम भर रहे थे। धान खरीद और राशन वितरण घोटाला में राज्य के मंत्री और व्यवसाई जेल में है। ईडी मामले की जांच कर सच्चाई को उजागर करने में लगी है।




