हिंसक घटनाओं के बाद इंडो-नेपाल सीमा पर कड़ी निगरानी

 

रमेश ठाकुर के साथ नंदलाल पटेल, पश्चिम चंपारण_
भारत-नेपाल सीमा को अचानक सील कर दिए जाने से दोनों देशों के नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई है। वाल्मीकिनगर बॉर्डर पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और एसएसबी के जवान पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। पैदल आवाजाही से लेकर वाहनों की आवाजाही तक पूरी तरह रोक दी गई है।

*आम जनजीवन पर बड़ा असर*

सीमा बंद होने का सबसे बड़ा असर मजदूर, छात्र और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है, जो रोजाना भारत और नेपाल के बीच आने-जाने के आदी थे। वाल्मीकिनगर और आसपास के गांवों के लोग अक्सर दैनिक आवश्यकताओं के लिए नेपाल जाते हैं, वहीं नेपाल के सीमावर्ती इलाकों के लोग भारत में खरीदारी और रोजगार के लिए आते रहते हैं। अचानक लगी रोक ने दोनों तरफ की जनता को गंभीर संकट में डाल दिया है।

*रिश्तों की डोर पर खिंचाव*

भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का गहरा रिश्ता है। भारत की कई बेटियां नेपाल के घर-आंगन की शोभा बनी हैं तो नेपाल की बेटियां भारत के घरों में रच-बस गई हैं। सीमा बंद होने से रिश्तेदारों से मुलाकात ठप हो गई है। वहीं नेपाल में नेटवर्क सेवाएं ठप होने के कारण लोग फोन पर भी आपस में संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इससे दोनों देशों के परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।

*क्यों सील की गई सीमा?*

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में नेपाल में हुए हिंसक प्रदर्शनों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। सीमा क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

*कब खुलेगी सीमा?*

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर ही सीमा खोली जाएगी। फिलहाल किसी भी प्रकार की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है।

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