सरकारी योजनाओं से बने भवन पर किया कब्जा, नाम बदल कर खोला निजी मदरसा

 

प्रियंका कुमारी

बखरी, बेगूसराय संवाददाता। बखरी प्रखंड अंतर्गत चक्हमीद पंचायत में सरकारी योजनाओं से निर्मित भवनों पर अवैध कब्जा कर उन्हें निजी संपत्ति में बदलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

जदयू नेता सह बीस सूत्री सदस्य मो मोअज्जम द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए आवेदन के अनुसार, पंचायत के पूर्व मुखिया अब्दुल हलीम द्वारा वर्ष 2008-09 में बीआरजीएफ योजना के तहत दो कमरे का भवन 4,72,700 रुपये की लागत से अपने निजी जमीन पर बनवाया गया। जिसमें बिहार के राज्यपाल के नाम की आवश्यकता होते हुए भी कोई नामांकन नहीं कराया गया। इसके बाद क्रमशः सांसद निधि योजना (वर्ष 2011-12), मनरेगा जिला परिषद योजना तथा पंचायत समिति योजना के अंतर्गत चार भवन बनाए गए। जिनकी कुल लागत लगभग 47 लाख रुपये बताई जा रही है। आवेदन में दावा किया गया है कि इन सभी भवनों से सरकारी योजना के नाम-पट्ट हटा दिए गए हैं और इन पर अवैध रूप से अपने पिता जमिया सलिमिया के नाम से कर लिये हैं। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कुल 6 कट्ठा 10 धुर जमीन पर निर्मित इन भवनों में से केवल 2 कट्ठा भूमि को वर्ष 2011 में राज्यपाल के नाम नामांकित किया गया था। वहीं, वर्ष 2022 में 1,000 रुपये के स्टांप पेपर पर मौलाना मुर्सीद के नाम से जमीन का नामांकन करवा लिया गया, जो कि कानूनी रूप से विवादास्पद माना जा रहा है। आरोप यह भी है कि मौलाना मुर्सीद बिहार सरकार में किसी भी अधिकृत पद पर नहीं हैं और उनके विदेशी एजेंसियों से संबंध व अवैध संपत्ति होने की भी बात कही गई है। जिसे लेकर जाँच की माँग की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला बखरी प्रखंड की बीस सूत्री बैठक में उठाया गया। जिसके पश्चात प्रखंड विकास पदाधिकारी ने पंचायती राज पदाधिकारी को जाँच सौंप दी। लेकिन आरोप है कि जाँच में भारी अनियमितता की गई और एक भवन बीआरजीएफ योजना को पूरी तरह से नजरअंदाज कर, शेष तीन भवनों को भी गलत तरीके से दर्शाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायती राज पदाधिकारी ने मोटी रिश्वत लेकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है। अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने के लिए सीबीआई स्तर की गोपनीय जाँच की माँग की गई है, ताकि सरकारी योजनाओं की राशि का दुरुपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

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