‘भारत माता की जय’ नारा के सूत्रधार अजीमुल्ला खान की 1857 की क्रांति में अहम योगदान
पटना, प्रारंभिक स्तर पर ही बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से 1857 की क्रांति के क्रांतिदूत व ‘भारत माता की जय’ नारा के सूत्रधार अजीमुल्ला खान की जयंती राजकीयकृत उर्दू मध्य विद्यालय नरकट घाट, गुलजारबाग, पटना में काफी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पण किया गया।
छात्र-छात्राओं को उनके जीवनवृत्त एवं कृतित्व से अवगत कराते हुए विद्यालय के स्नातक विज्ञान शिक्षक सूर्य कान्त गुप्ता ने बताया कि 1857 की क्रांति का अलख जगाने वाले क्रांतिदूत अजीमुल्ला खान का जन्म 17 सितंबर 1830 ई. को कानपुर में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम नजीबुल्लाह एवं माता का नाम करीमन था। नजीबुल्लाह राज मिस्त्री का कार्य करते थे। बचपन में ही उनका परिवार अंग्रेजों के जुल्म का शिकार हुआ। उनके पिता को अंग्रेजों ने मार डाला। बाद में वे उर्दू, फारसी, हिंदी एवं संस्कृत सीखे तथा नाना साहब के प्रधान सलाहकार, दीवान व प्रधानमंत्री बने। 1857 की क्रांति हेतु ये सभी रियासतों व सैनिकों से संपर्क साधे और उन्हें विद्रोह के लिए तैयार किया। इसलिए इन्हें क्रांतिदूत के नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने मादरे वतन भारत की जय का नारा दिया । इन्होंने पयाम-ए-आजादी नामक अखबार निकाली, जिसमें क्रांति व विद्रोह का प्रचार-प्रसार होता था। इनका लिखा ‘गीत हम हैं इसके मालिक हिंदुस्तान हमारा’ विद्रोह का जोशीला गीत बना। 1857 की क्रांति में अजीमुल्ला खान का अहम योगदान रहा।
इस अवसर पर विद्यालय के उपस्थित छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। मौके पर उपस्थित विद्यालय के प्रधानाध्यापक एस इब्तेशाम हुसैन काशिफ, शिक्षिका प्रणय कुमारी, तालिमी मरकज सदस्या रेशमा खातून ने भी छात्र-छात्राओं को अजीमुल्ला खान के जीवन एवं कृतित्व से संबंधित विभिन्न घटनाओं के बारे में छात्र-छात्राओं को जानकारी प्रदान की।




