कई इंस्पेक्टरों के तबादले में अब गोविंद नगर को भी मिला इंस्पेक्टर अशोक दुबे की कर्मठता का लाभ
सुनील बाजपेई
कानपुरI कानून और शांति व्यवस्था के पक्ष में अपराधियों के खिलाफ लगातार सफल मोर्चा खोले यहां के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कई थानेदारों में फेर बदल बदल किया है, जिसके क्रम में चकेरी अनवर गंज और किदवई नगर के बाद अब चुनौती पूर्ण गोविंद नगर की कमान इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुुुबे के हवाले की है।
गोविंद नगर से पहले नौबस्ता, चकेरी ,जाजमऊ, घाटमपुर ,अनवरगंज और किदवई नगर में भी पीड़ितों की हर संभव सहायता के साथ ही कानून और शांति व्यवस्था के पक्ष में अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के मामले में इंस्पेक्टर अशोक दुुुबे की नेतृत्व कुशलता सदैव सफल रही है और अब कर्तव्य के प्रति उनकी प्रगाढ़ निष्ठा कठोर परिश्रम के साथ पीड़ितों के हित में अपराधियों के खिलाफ गोविंद नगर में भी सक्रिय है।
दरअसल पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल की मंशा चार्ज के मामले में केवल उन्हीं थानेदारों को महत्व देना है ,जो कानून और शांति व्यवस्था के पक्ष में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करते हुए अपने कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं ,जिनमें इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे का भी नाम शामिल है। जहां तक प्रभारी निरीक्षक गोविंद नगर के रूप में तेजतर्रार, व्यवहार कुशल और जुझारू तेवरों वाले इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे की चुनौतीपूर्ण नियुक्ति का सवाल है , उसे उनकी कानून और शांति व्यवस्था के पक्ष में अपराधियों के खिलाफ और पीड़ितों के हित में अपने कर्तव्य का पालन सदैव निष्ठा और ईमानदारी के साथ करना ही माना जा रहा है। यही नहीं यूपी की पुलिस सेवा में आने के बाद निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यशैली के कठोर परिश्रमी इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे के अब तक के कार्यकाल के विवेचन से यह भी साबित होता है कि हालात चाहे जैसे रहे हों लेकिन निर्दोष फंसे नहीं और अपराधी बचे नहीं जैसी लोकहित की प्रबल विचारधारा के अनुरूप अपनी धुन के भी पक्के बेहद निडर और स्वाभिमानी इंस्पेक्टर अशोक दुबे ने अपनी कर्तव्य के प्रति निष्ठा के साथ समझौता आज तक नहीं किया।
इसी के साथ निर्दोष फंसे नहीं और अपराधी बचे नहीं जैसी लोकहित की प्रबल विचारधारा वाले इंस्पेक्टर अशोक दुबे की कार्यशैली भी संभ्रांत असहाय लोगों की हितरक्षक और बहुत मैत्रीपूर्ण भी मानी जाती है ,जिसके अनुरूप ही भगवान और भाग्य यानी कर्म भरोसे रहने वाले इंस्पेक्टर अशोक दुबे जहां उचित पात्र लोगों की हर संभव सहायता करते हैं। साथ ही उनकी निडरता कानून और शांति व्यवस्था के पक्ष में अपराधियों के खिलाफ शठे शाठ्यम समाचरेत वाली कहावत चरितार्थ करने से भी नहीं चूकती। यही वजह है कि भौतिक संसार में हर स्तर की सक्षमता और संपन्नता से परिपूर्ण होने के बाद भी अहंकार शून्य ‘शिवत्व’ स्वभाव के इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे की कर्तव्य के प्रति उनकी प्रगाढ़ निष्ठा उनकी जुझारू नौकरी के अब तक के कार्यकाल में सभी संगीन घटनाओं का सटीक खुलासा करते हुए दर्जनों शातिरों को सबक सिखाने में भी सफल हो चुकी है।




