प्राकृतिक आपदा में मरने वालो की संख्या पहुंची 40, कई घायल

- नष्ट हुए शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पर मुहैया कराएगा उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषदउच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद

 

चाय बागान मालिक मांगेंगे राज्य सरकार से मदद, राहत बचाव कार्य जारी

अजित प्रसाद/ सिलीगुड़ी: उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग समेत अन्य तीन जिलों में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है। पिछले 24 घंटों में एक और शव बरामद होने के बाद यह आंकड़ा बढ़ा है। वही बंगाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से जहां हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, वहीं कई छात्रों के महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेज भी नष्ट या गुम हो गए हैं। इन छात्रों की परेशानी को देखते हुए पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है।
परिषद ने घोषणा की है कि जिन छात्रों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, एडमिट कार्ड, मार्कशीट या पास सर्टिफिकेट हालिया बाढ़ या भूस्खलन के कारण खो गए हैं, उन्हें इन दस्तावेजों की डुप्लीकेट कॉपी बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। क्यों लिया गया यह फैसला?: राज्य के कई हिस्सों में हाल ही में बाढ़ और भूस्खलन के चलते लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। कई छात्रों के स्कूल दस्तावेज पानी में बह गए या नष्ट हो गए। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए परिषद ने मानवीय आधार पर यह निर्णय लिया है ताकि किसी भी छात्र की पढ़ाई या भविष्य इस आपदा के कारण प्रभावित न हो. परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल मानवता के आधार पर लिया गया है।
कैसे मिलेगा डुप्लीकेट सर्टिफिकेट?: छात्रों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए अपने संस्थान के प्रधान के माध्यम से आवेदन करना होगा. आवेदन के साथ, प्रधानाचार्य को यह प्रमाणित करना होगा कि छात्र ने अपने मूल दस्तावेज बाढ़ या भूस्खलन के कारण खो दिए हैं या नष्ट हो गए हैं
यानि, कोई भी छात्र सीधे परिषद को आवेदन नहीं भेज सकता आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह संस्थान के माध्यम से होगी. जब HOI इस बात की पुष्टि करेंगे कि छात्र वास्तव में आपदा से प्रभावित हुआ है, तब परिषद उसके लिए डुप्लीकेट दस्तावेज जारी कर देगा। किन दस्तावेजों के लिए मिल सकती है यह सुविधा?
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (Registration Certificate)
एडमिट कार्ड (Admit Card)
मार्कशीट (Marksheet)
पास सर्टिफिकेट (Pass Certificate)
कब और कहां करें आवेदन: आवेदन प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से शुरू हो चुकी है. जिन छात्रों के दस्तावेज हाल ही में आई बाढ़ या भूस्खलन के कारण खो गए हैं, वे अपने स्कूल या कॉलेज से संपर्क कर सकते हैं. संस्थान के प्रमुख अधिकारी छात्रों के आवेदन को सत्यापित करने के बाद, उसे परिषद के पास भेजेंगे। परिषद का मानवीय कदम: परिषद के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) चिरंजीब भट्टाचार्य ने इस पहल पर कहा है कि यह निर्णय केवल बाढ़ प्रभावित छात्रों की मदद के लिए लिया गया है. उन्होंने कहा हम नहीं चाहते कि किसी भी छात्र का भविष्य प्राकृतिक आपदा की वजह से अंधकारमय हो. शिक्षा हर किसी का अधिकार है और परिषद यह सुनिश्चित करेगी कि छात्र बिना किसी अतिरिक्त बोझ के अपने दस्तावेज फिर से प्राप्त कर सकें.
चाय बागान मालिक मांगेंगे राज्य सरकार से मदद :उत्तर बंगाल में लगातार हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से दार्जिलिंग के चाय बागानों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में बागानों की आंतरिक सड़कों, बिजली और जल आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।इस विनाश के बाद दार्जिलिंग के चाय बागान मालिक अब राज्य सरकार से मदद मांगने की तैयारी में हैं, ताकि बागानों में बुनियादी ढांचा और संचार व्यवस्था दोबारा बहाल की जा सके और भविष्य की फसल प्रभावित न हो। जानकारी के अनुसार, दार्जिलिंग के करीब 30 से 35 चाय बागान भारी बारिश और भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर चाय की झाड़ियां बह गईं, श्रमिकों के घर नष्ट हो गए और कुछ मजदूरों की मौत की भी खबर है। दार्जिलिंग टी एसोसिएशन (डीटीए) की बैठक में राज्य सरकार से सहायता की मांग करने का निर्णय लिया गया। संगठन के वरिष्ठ सदस्य और चामोंग टी के चेयरमैन अशोक लोहिया ने बताया कि भारी वर्षा से बागानों के अंदर की सड़कों को गंभीर क्षति पहुंची है। डीटीए के प्रधान सलाहकार संदीप मुखर्जी ने कहा, “हमने यह तय किया है कि राज्य सरकार से बागानों में सड़कों, पेयजल और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए सहायता मांगी जाएगी, ताकि कामकाज सुचारू रूप से चल सके।”दार्जिलिंग की चाय उत्पादक कंपनियों के लिए यह नुकसान और भी बड़ा झटका है, क्योंकि शरद ऋतु की फसल – जो सालाना उत्पादन का लगभग 15 से 20 प्रतिशत होती है – इस बार बुरी तरह प्रभावित हुई है। पिछले वर्ष दार्जिलिंग की सुगंधित चाय का उत्पादन छह मिलियन किलोग्राम से भी नीचे चला गया था।मुखर्जी के अनुसार, “करीब 200 से 250 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की झाड़ियां नष्ट हो गई हैं, जिससे बागान मालिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।”

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