“दहेज प्रथा “समाज पर कलंक, बेटियों पर अत्याचार
वाणी संवाददाता
नई दिल्ली भारत पोस्ट राष्ट्रीय जनशक्ति सेवा संघ (RJSS) दहेज प्रथा को समाज के लिए एक अभिशाप मानता है। यह कुप्रथा आज भी लाखों बेटियों के जीवन को निगल रही है। रोज़ कहीं न कहीं किसी बेटी को दहेज के लोभ में प्रताड़ित किया जाता है, उसे जलाया जाता है या मार दिया जाता है। यह केवल सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि मानवता पर कलंक है।
आज दुख की बात है कि केवल लड़के वाले ही दोषी नहीं, बल्कि कई बार लड़कियों के माता-पिता भी इस कुरीति को बढ़ावा दे रहे हैं। अच्छे लड़के की चाहत में वे अधिक से अधिक दहेज देने को तैयार रहते हैं, जिससे लालची मानसिकता को बल मिलता है।
अगर यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो हमारी बेटियों का शोषण, हत्या और उत्पीड़न रुकने का नाम नहीं लेगा।
RJSS समाज से आह्वान करता है:
दहेज देने और लेने दोनों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए।
माता-पिता अपनी बेटियों को दहेज नहीं, शिक्षा और आत्मनिर्भरता दें।
हर नागरिक दहेज मुक्त विवाह को अपनाए और दूसरों को भी प्रेरित करे।
सरकार व प्रशासन को दहेज के मामलों में त्वरित व कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
RJSS का संकल्प:
हम दहेज प्रथा के विरुद्ध जनजागरण अभियान चलाकर इस कुप्रथा को समाप्त करने हेतु संघर्षरत हैं। हमारी बेटियों को सुरक्षा, सम्मान और समानता दिलाना हमारा पहला कर्तव्य है।
“दहेज लोभी को ना कहें, बेटियों को जीने का अधिकार दें।”
Dinesh Kumar
Advocate, Supreme Court of India
National Spokesperson, Rashtriya Janshakti Sewa Sangh (RJSS)



