एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और टीएमसी आमने -सामने

आयोग का निर्देश हर हाल में बूथ लेवल अधिकारियों की सुरक्षा हो मुहैया, टीएमसी मान रही आयोग को खूनी

 

– निर्देश के बावजूद हो रहे हमले, बनाए जा रहे राजनीतिक दबाव

अजित प्रसाद/ सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने वोटर लिस्‍ट को दुरुस्‍त करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया है. बंगाल के सीमाई जिलों से कई ऐसी तस्‍वीरें सामने आ रही हैं, जिनमें अवैध बांग्‍लादेशियों को बॉर्डर के उस पार जाते हुए देखा जा सकता है. सत्‍तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि इसके जरिये वोट काटने का काम किया जा रहा है.

मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने आयोग के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. टीएमसी के प्रतिनिधियों ने मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त से इस बाबत मुलाकात भी की है. ममता बनर्जी की पार्टी ने खुलेआम कहा कि चुनाव आयोग के हाथ खून से रंगे हैं. दरअसल, टीएमसी का दावा है कि SIR शुरू होने के बाद से अभी तक 40 मौतें हुई हैं, जिनमें बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) भी शामिल हैं. दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने इस आरोप का जवाब देते हुए पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्‍नर को चिट्ठी लिखकर बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। बंगाल में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और टीएमसी आमने सामने है। चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय में सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित हालिया घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है. साथ ही मतदाता सूची के स्वतंत्र संशोधन को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं.
ECI ने कोलकाता स्थित CEO ऑफिस को “सुरक्षा उपयुक्त स्थान” पर शिफ्ट करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा कोलकाता पुलिस कमिश्नर को वर्तमान और नए कार्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए गए हैं.आयोग का दावा है कि पश्चिम बंगाल में 26 लाख वोटर्स ऐसे हैं, जिनके नाम साल 2002 के इलेक्‍टोरल रोल्‍स से मैच नहीं करते हैं. चुनाव आयोग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि ऐसे वोटर्स को अब आगे क्‍या करना होगा और उचित कदम न उठाए जाने पर आयोग क्‍या एक्‍शन ले सकता है। चुनाव आयोग ने TMC को निर्देश दिया कि 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद ही अपने दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराए। इससे पहले किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप BLOs, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) के स्वतंत्र कार्य में न किया जाए। इसके बावजूद भी इस प्रक्रिया में संलग्न अधिकारियों को अनेक बाधाओं का सामना करना पड रहा है । राज्य के मालदा जनपद के हरीशचंद्रपुर क्षेत्र के दाटण ग्राम में ‘बी.एल.ओ.’ (बूथ स्तरीय अधिकारी, अर्थात मतदान-केंद्र अधिकारी) के रूप में कार्यरत प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका के पति पर तृणमूल कांग्रेस से संबंधित मोहम्मद कासिमुद्दीन ने आक्रमण किया ।
‘बी.एल.ओ.’ निवेदिता मंडल ने आरोपी के विरुद्ध पुलिस में शिकायत प्रविष्ट की है । इस शिकायत के अनुसार स्थानीय भू-माफिया, भूतपूर्व कांग्रेस पंचायत सदस्य तथा वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस से जुडे मोहम्मद कासिमुद्दीन ने निवेदिता तथा उनके पति कमल मोंडल पर यह दबाव डाला कि ‘मेरे आदेशानुसार ही ‘विशेष गहन पुनरावलोकन’ प्रक्रिया के प्रपत्रों का वितरण तथा संकलन करो’ । निवेदिता मंडल ने उसकी अनुचित आज्ञाओं का पालन करना स्पष्टता से अस्वीकार कर दिया । तब कासिमुद्दीन ने कमल मोंडल पर क्रूरतापूर्वक आक्रमण कर उन्हें अत्यंत गंभीर रूप से घायल किया । उनके गुप्तांगों पर अनेक प्रहार किए गए ।’हम पर उसके आदेश मानने का निरंतर दबाव बनाया जाता रहा । जब हमने अस्वीकार किया, तब मेरे पति को लगभग मृत्यु-समान पीटा गया’, ऐसा निवेदिता का कहना है। मालूम हो कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) पर दबाव, धमकी और हस्तक्षेप की शिकायतों के बीच भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने तृणमूल कांग्रेस (AITC) को कड़ी चेतावनी जारी की है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं से जुड़े प्रविष्टियों की जांच के समय BLOs को पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए।।बैठक में आयोग ने तृणमूल कांग्रेस द्वारा उठाई गई सभी आशंकाओं और जिन पर उसने “बेबुनियाद आरोप” कहा, उनका बिंदुवार खंडन प्रस्तुत किया। आयोग ने TMC को निर्देश दिया कि 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद ही अपने दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराए। इससे पहले किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप BLOs, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) के स्वतंत्र कार्य में न किया जाए। सभी अधिकारी राज्य सरकार के अधीन हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के लिए उन्हें आयोग को सौंपा गया है। बैठक में ECI ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय में सुरक्षा उल्लंघन की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता जताई। आयोग ने निर्देश दिया कि CEO कार्यालय को तुरंत एक अधिक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, कोलकाता पुलिस आयुक्त को मौजूदा कार्यालय और नए परिसर दोनों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने कहा कि BLOs पर दबाव की घटनाएँ चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं और यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है। SIR के दौरान राज्य के कई हिस्सों में BLOs के साथ दुर्व्यवहार और हमले की खबरें भी सामने आई थीं, जिन पर आयोग ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की धमकी, डराने या डेटा अपडेट में दबाव डालने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आयोग ने यह भी दोहराया कि त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव है और इसके लिए BLOs को स्वतंत्र, सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल में काम करने देना अत्यंत आवश्यक है।

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