पर्व त्यौहार: धर्म संस्कृति और समाज दीवाली
राजीव कुमार झा
शरद ऋतु में आयोजित होने वाली दीवाली मनुष्य को अज्ञान के अंधेरे से ज्ञान के प्रकाश की ओर उन्मुख करती है। सारी दुनिया में धर्म – अधर्म, पाप – पुण्य, सत्य और असत्य की लड़ाई मनुष्य को जीवन में सतत् साहस और संकल्प से सद्कर्म की ओर उन्मुख करती रही है।
सदियों से दीवाली का त्योहार सबको नवजीवन का संदेश प्रदान करता रहा है। हमारे देश की महान संस्कृति और उसकी उज्ज्वल परंपराओं को दीपावली हरेक साल अपनी पावन दीपमालिकाओं की टिमटिमाहट में साकार करती है। यह त्योहार भारत में रामराज्य के प्रवर्तन की खुशी में मनाया जाता है और इस दिन संसार में व्याप्त अंधेरे को अयोध्यावासियों ने अपने जीवन की पवित्र रोशनी से दूर किया था।
दीपावली सुख समृद्धि का त्योहार है और कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन आयोजित होने वाला यह त्योहार अब सारे संसार में जहां भी भारतवासी हैं, यह हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। यह त्योहार मनुष्य को पवित्रता का संदेश देता है और हमारे देश में इस मौके पर सर्वत्र सफाई और शुचिता का कार्य संपन्न होता है।
आज भी यह परंपरा देश के तमाम गांवों और कस्बों, शहरों में है।
दीपावली पर अब आतिशबाजी का भी प्रचलित हो गया है और इससे हरेक साल देश में काफी लोग दहन की दुर्घटना से त्रस्त हो जाते हैं। आतिशबाजी पर सरकार को रोक लगाना चाहिए।
दीपावली की आतिशबाजी में बच्चों के संग खासकर दुर्घटना होती है इसलिए सरकार को इसकी रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए।


