पूर्व मंत्री और उनकी पुत्री एसएससी भर्ती घोटाले के मामले में विशेष सीबीआई अदालत में किया आत्मसमर्पण

 

अजित प्रसाद – कोलकाता (पश्चिम बंगाल ): बंगाल के पूर्व मंत्री परेश चंद्र अधिकारी और उनकी बेटी अंकिता अधिकारी ने बुधवार को एसएससी भर्ती घोटाले के मामले में अलीपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत में पेश होने के बाद दोनों ने जमानत याचिका दाखिल की। परेश और अंकिता के साथ ही पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के पूर्व निजी सचिव सुकांत आचार्य ने भी अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब सीबीआई ने हाल ही में कक्षा नौ-10 और 11-12 की भर्ती से जुड़े मामलों में अंतिम आरोपपत्र दाखिल किया है। पिछले शुक्रवार को एजेंसी ने ग्रुप-सी मामले में भी अंतिम चार्जशीट अलीपुर अदालत में पेश की थी। अब तक कुल चार आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें 75 लोगों को अदालत में पेश होने का समन भेजा गया है।
गौरतलब है कि एसएससी की कथित दागी उम्मीदवारों की सूची में अंकिता अधिकारी का नाम 104वें नंबर पर था। उन्होंने राजनीति विज्ञान की शिक्षिका के रूप में कक्षा 11-12 में नियुक्ति पाई थी। उनकी नियुक्ति को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। आरोप था कि अंकिता ने अवैध तरीके से नौकरी हासिल की थी। इस मामले में शिकायतकर्ता बबीता सरकार ने अदालत का रुख किया था। मई 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली ने अंकिता की नियुक्ति रद्द करते हुए उनकी अब तक की वेतन राशि लौटाने का आदेश दिया था। इसके बाद करीब 15 लाख रुपये बबीता सरकार को दिए गए, लेकिन बाद में उनकी मूल्यांकन प्रक्रिया में भी गड़बड़ी सामने आने पर उनकी नौकरी भी चली गई। अंततः यह पद अनामिका रॉय को दिया गया, जो बाद में पिछले वर्ष 26 हजार अन्य नियुक्तियों के साथ रद्द कर दिया गया।
इधर, पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अन्य आरोपितों ने भी जमानत याचिका दायर की, जिसका सीबीआई ने कड़ा विरोध किया। एजेंसी का कहना है कि हर मामले की अलग प्रकृति है और उन्हें जोड़कर नहीं देखा जा सकता। साथ ही, भर्ती घोटाले से समाज पर गंभीर असर पड़ा है। गौरतलब है कि 2022 में सीबीआई ने एसएससी भर्ती घोटाले की जांच शुरू की थी। जांच शुरू होने के महज 51 दिनों के भीतर एजेंसी ने पहला आरोपपत्र दायर किया था, जिसमें पार्थ चटर्जी, समरजीत आचार्य, सलाहकार समिति के पूर्व प्रमुख शांति प्रसाद सिन्हा, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सौमित्र सरकार, अशोक कुमार साहा, अस्थायी समिति अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली समेत कई अवैध रूप से नियुक्त उम्मीदवारों के नाम शामिल थे। हालिया आरोपपत्र में कोई नया नाम सामने नहीं आया है, हालांकि सीबीआई ने इसमें नए दस्तावेज, सबूत और पांच आरोपितों के वॉयस सैंपल रिपोर्ट संलग्न किए हैं। लगातार हो रहे खुलासों और गिरफ्तारियों से यह घोटाला राज्य की राजनीति और शिक्षा जगत में भूचाल पैदा कर चुका है।

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