“जल सुरक्षित तो राष्ट्र सुरक्षित” : बिहार वाटरशेड महोत्सव-2026 का भव्य शुभारम्भ, 42 कार्यों का शिलान्यास !
रमेश ठाकुर
“जल सुरक्षित तो राष्ट्र सुरक्षित” के संकल्प के साथ बिहार वाटरशेड महोत्सव–2026 का राज्यस्तरीय शुभारम्भ शुक्रवार को बामेती, पटना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत जलछाजन विकास घटक के अंतर्गत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल ने की।
इस अवसर पर माननीय मंत्री ने पौधारोपण किया तथा योजना से लाभान्वित महिलाओं द्वारा निकाली गई जल कलश यात्रा का शुभारम्भ किया। वाटरशेड योजना के अंतर्गत 42 विकासात्मक कार्यों का शिलान्यास एवं 61 कार्यों का लोकार्पण किया गया। साथ ही योजना की उपलब्धियों पर आधारित ‘सफलता की कहानियाँ’ पुस्तक का विमोचन एवं वाटरशेड से जुड़े नवाचारों व प्रभावों को दर्शाने वाले सूचनात्मक वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए योजनाओं से हुए लाभों की जानकारी दी।
अपने संबोधन में कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने जल संरक्षण को जीवन और विकास का मूल आधार बताते हुए कहा कि “पानी ही जीवन है।” उन्होंने रहीमदास के दोहे का उल्लेख करते हुए जल के महत्व पर प्रकाश डाला। मंत्री ने कहा कि भारत नदियों का देश है और बिहार नदियों का राज्य, जहाँ जल, भूमि और प्रकृति संरक्षण हमारी सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि विभाग द्वारा पीएम कृषि सिंचाई योजना वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट 2.0 के तहत दक्षिण बिहार के 17 जिलों एवं उत्तर बिहार के बेगूसराय सहित कुल 18 वर्षा-आश्रित जिलों में 35 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस पंचवर्षीय योजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत पौधारोपण, चेक डैम, खेत तालाब, जल संचयन संरचनाओं, आहर-पईन एवं कुओं के निर्माण व जीर्णोद्धार के व्यापक कार्य किए गए हैं। आगामी वित्तीय वर्ष में पीएमकेएसवाई 3.0 की शुरुआत की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग 9 लाख हेक्टेयर भूमि भू-क्षरण से प्रभावित है, जिसे रोकने के लिए जल-जीवन-हरियाली मिशन के तहत तालाबों एवं आहर-पईन का जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और अतिक्रमण मुक्त करने का कार्य किया गया है। गंगा जल को पाइपलाइन के माध्यम से नालंदा, राजगीर, गया और नवादा तक पहुँचाना जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री के “फोर-आर” (रिड्यूस, रीयूज, रिचार्ज, रिसाइकल) और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान का उल्लेख करते हुए युवाओं एवं जीविका दीदियों से जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने का आह्वान किया।
प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि मानव जीवन में भूमि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत हमारी अमूल्य पूंजी है, जिसके संरक्षण के लिए ठोस एवं दीर्घकालीन प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव भूमि एवं जल संरक्षण को नई दिशा देगा।
कार्यक्रम में ग्रामीण कार्य, ग्रामीण विकास, वन एवं पर्यावरण, पंचायती राज, जल संसाधन विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, बड़ी संख्या में किसान एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

