‘’एक पेड़ मां के नाम’’ संदेश के साथ मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस को उत्सव नहीं जीवन में उतारने का संकल्प लें I
* 'एक पेड़ माँ के नाम' * सतत विकास * पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली
अजित प्रसाद/ सिलीगुड़ी: आज विश्व पर्यावरण दिवस है। आज हमारे बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। केंद्र सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को ध्यान में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश दिया गया।
कभी उत्तरबंगाल को चेरापूंजी के नाम से जाना जाता था। आज कंक्रीट के जंगल में ऐसी और अस्पतालों में ऑक्सीजन से लोग अपनी सांसे बचाने में लगे है।जब पृथ्वी की हरियाली सिमटने लगे, नदियों का निर्मल जल विषाक्त होने लगे, वायुमंडल का संतुलन डगमगाने लगे और ऋतुओं का शाश्वत संगीत असंगति में बदलने लगे, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि मानव सभ्यता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां विकास और विनाश के बीच की रेखा अत्यंत सूक्ष्म हो गई है। प्रकृति केवल मानव जीवन की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व की आधारशिला है। “माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः।” अर्थात् यह भूमि हमारी माता है और हम इस पृथ्वी के पुत्र हैं।इसी सत्य को स्मरण कराने और वैश्विक समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। विश्व
पर्यावरण दिवस
विश्व पर्यावरण दिवस की पृष्ठभूमि बीसवीं शताब्दी के उस दौर से जुड़ी है जब औद्योगिकीकरण और तीव्र आर्थिक विकास के दुष्प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे थे। वर्ष 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में United Nations Conference on the Human Environment का आयोजन हुआ। यह सम्मेलन मानव और पर्यावरण के संबंधों पर आयोजित पहला वैश्विक सम्मेलन था। इसी सम्मेलन के दौरान पर्यावरण संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय एजेंडा का महत्वपूर्ण विषय बनाया गया। बाद में United Nations ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया और वर्ष 1973 से इसका आयोजन प्रारंभ हुआ। तब से यह दिवस विश्व के 150 से अधिक देशों में पर्यावरणीय चेतना के सबसे बड़े जन-अभियान के रूप में मनाया जा रहा है।
वर्तमान वैश्विक पर्यावरणीय संकट
आज जलवायु परिवर्तन मानवता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग, औद्योगिक उत्सर्जन और वनों की अंधाधुंध कटाई ने वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ा दी है। परिणामस्वरूप पृथ्वी का औसत तापमान निरंतर बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों का उल्लेख किया है:
• ‘एक पेड़ माँ के नाम’: उन्होंने लोगों से अपनी माँ के सम्मान में या उनकी स्मृति में कम से कम एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने का आग्रह किया है。
• सतत विकास (Sustainable Development): उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने हरित आवरण का विस्तार किया है और कई वन्यजीवों की आबादी में वृद्धि की है, जो सामूहिक प्रयासों का परिणाम है。
• पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली (Mission LiFE): पीएम मोदी ने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके, जैसे पानी बचाना, बिजली की बचत करना और प्लास्टिक का कम उपयोग करके जलवायु परिवर्तन से लड़ने का संदेश दिया हैं।




