सड़क पर जौहर यूनिवर्सिटी के गेट
-सरकारी खाते से खर्च हुए थे 13 करोड़
-40 में से 38 भवनों को किया है अवैध घोषित
भारत पोस्ट संवाददाता
रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर की सड़क को सरकारी बताते हुए लोक निर्माण विभाग ;पीडब्ल्यूडी ने वहां आम रास्ते का बोर्ड तो लगा दिया लेकिन इस पर अमल नहीं कराया जा सका। इसका कारण यूनिवर्सिटी का गेट है, जिसे हटाए बिना सड़क का स्वरूप आम रास्ते जैसा नहीं हो सकता। गेट को हटाने की कोशिश रोकने के लिए यूनिवर्सिटी के पास पहले से हाईकोर्ट का स्टे है। लिहाजा अपने फैसले पर अमल कराने में फिलहाल लोक निर्माण विभाग भी ठिठक गया है।
सपा नेता आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी के भीतर बनी 3.5 किमी लंबी सड़क लंबे समय से सवालों के घेरे में है। लोक निर्माण विभाग ने इसे सरकारी सड़क बताते हुए स्पष्ट किया था कि मई 2016 में सपा शासन में त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए 17 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। 13 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़क का चौड़ीकरण कराया गया था।
बुधवार को रामपुर विकास प्राधिकरण की तरफ से यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी होने के फौरन बाद पीडब्ल्यूडी ने यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर आम रास्ते का बोर्ड लगाते हुए इस सड़क को सामान्य लोगों के लिए खोल देने की बात कही थी। आम लोगों को यूनिवर्सिटी की सड़क से रास्ता दिलाने की बात कहने वाले पीडब्ल्यूडी के कदम बृहस्पतिवार को थम गए।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केवी सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी के गेट का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर हाईकोर्ट का स्टे प्रभावी है। ऐसे में न्यायालय के आदेश का पालन करना अनिवार्य है। हालांकि गेट से कोई भी आम आदमी निकल सकता है उसे रोका नहीं जा सकता।
दूसरी ओर आम लोगों का सवाल है कि यूनिवर्सिटी के नियंत्रण वाले गेट में ही आम आदमी कैसे दाखिल हो सकता है, जो इस सड़क को अपने रास्ते के तौर पर इस्तेमाल कर सके। इस सवाल का जवाब फिलहाल जिम्मेदारों के पास नहीं है।इस बीच सपा के नगर अध्यक्ष एवं आजम खां के करीबी आसिम राजा का कहना है कि जब तक अदालत का स्थगन आदेश समाप्त नहीं होता, तब तक गेट की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
रामपुर विकास प्राधिकरण ;आरडीए के उपाध्यक्ष एवं डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को बिना नक्शा पास कराए निर्मित मानते हुए उन्हें अवैध घोषित कर दिया है। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को 20 दिन के भीतर इन भवनों को स्वयं हटाने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं करने पर आरडीए की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
पीडब्ल्यूडी ने बृहस्पतिवार को यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया कि यह सड़क आम जनता के उपयोग के लिए खुली है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016.17 में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के दौरान करीब 17.16 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण कराया गया था। यह सड़क यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार से होते हुए लालपुर बांध तक जाती है।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता किशन वीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मुख्य गेट बंद कर दिया था, जिससे आम लोगों और विभागीय अधिकारियों का आवागमन बाधित हो गया। इसके बाद विभाग ने नोटिस जारी किए और मामला अदालत पहुंच गया। फिलहाल यह विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है।




