सोनभद्र में मिला एल्युमिनियम सिलिकेट का बड़ा भंडार

-यूपी.झारखंड सीमा पर हैं छह ब्लॉक य 26ः तक ग्रेड आंका

भारत पोस्ट संवाददाता
वाराणसी। सोनभद्र जिले में एल्युमिनियम सिलिकेट अयस्क ;एंडालुसाइट. का बड़ा भंडार मिला है। भारतीय खान ब्यूरो ;आईबीएम की रिपोर्ट 2024 के अनुसार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमा पर एंडालुसाइट के छह नए ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। कुल भंडार का 91 प्रतिशत यानी 114.25 मिलियन टन अनुमानित सोनभद्र में है। देश का सबसे बड़ा एंडालुसाइट का भंडार होने का भी अनुमान है। ब्राजील और श्रीलंका एंडालुसाइट के प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल हैं। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ;जीएसआई. की ओर से कोन.विंढमगंज क्षेत्र से जुड़े 48 वर्ग किलोमीटर इलाके में चार चरणों में किए गए सर्वेक्षण में उत्साहजनक परिणाम मिलने के बाद विस्तृत शोध, ड्रिलिंग और संभावित खनन को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय और बीएचयू के भू.वैज्ञानिकों की टीम कई बार जिले के खनिज भंडारों का सर्वे कर चुकी है। सर्वेक्षण में रेणुकूट वन प्रभाग स्थित जमतिहवा नाला की लगभग 180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानों से लेकर रजखड़ और दुद्धी के उत्तर की पहाड़ियों तक एंडालुसाइट की परतें मिलने की संभावनाएं सामने आई हैं। वहीं, वर्ष 2012.13 से 2020.21 तक जीएसआई ने चार चरणों में झारखंड से सटे कोन.विंढमगंज क्षेत्र ;सलईडीह.हरवरिया क्षेत्र. के लगभग 48 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था। भारतीय खान ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2020 तक जीएसआई की ओर से किए गए सर्वेक्षण के आधार पर उत्तर प्रदेश और झारखंड में एंडालुसाइट के छह फ्री होल्ड डिपॉजिट ;ब्लॉक. चिन्हित किए गए।
इनमें सोनभद्र के सलईडीह.हरवरिया, फुलवार समेत पांच ब्लॉक शामिल हैं, जहां 114.25 मिलियन टन ;91 प्रतिशत भंडार होने का अनुमान है। झारखंड के गढ़वा जिले के नगर.उंटारी क्षेत्र में 11.8 मिलियन टन ;9 प्रतिशत. भंडार मिला है। एंडालुसाइट का औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत आंका गया है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर, ओडिशा के मलकानगिरी राजस्थान के झुंझुनू, नागौर और टोंक तथा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भी एंडालुसाइट के संकेत मिले हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसारए सोनभद्र जिले की दक्षिणी सीमा पर छत्तीसगढ़ से सटे बभनी.बीजपुर क्षेत्र में सिलिमेनाइट ;एल्युमिनो सिलिकेट खनिज चट्टानों में बिखरे हुए क्रिस्टल के रूप में पाया गया है। यह पूरा क्षेत्र 600 मीटर से अधिक चौड़ा है और पूर्व में आसनडीह से पश्चिम में बाजिया तक छह किलोमीटर से अधिक दूरी में फैला है।
इस बेल्ट के मध्य भाग में छिपिया गांव के पास 200 मीटर चौड़े क्षेत्र में सिलिमेनाइट के बड़े क्रिस्टल मिलने के संकेत हैं। रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि इस बेल्ट के भीतर 10 से 25 मीटर चौड़े ऐसे क्षेत्र हैंए जिनमें 16 से 32 प्रतिशत ;औसतन 25 प्रतिशत सिलिमेनाइट मौजूद है। इसका कुल अनुमानित भंडार 10 मिलियन टन बताया गया है। एंडालुसाइट खनिज का उपयोग रत्न के रूप में भी किया जाता है। औद्योगिक क्षेत्र में इसका प्रमुख उपयोग इस्पात, सीमेंट और कांच उद्योगों में उच्च तापमान वाली भट्टियों की लाइनिंग के लिए अग्निरोधी ईंटें और ब्लॉक बनाने में होता है। यह अत्यधिक तापमान और रासायनिक दबाव को बिना पिघले सहन कर सकता है।

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