“कविता स्वास्थ्य भी ठीक करती है!” डॉ. स्मृति शर्मा से राजीव कुमार झा की बातचीत

साहित्य:टेक्स्ट साक्षात्कार:

 

डॉ. स्मृति शर्मा, गाजियाबाद के एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत। महिला एवं बाल स्वास्थ्य के लिए समर्पित।_

प्रश्न – . आजकल सोशल मीडिया पर साहित्य लेखन की स्थिति को आप कैसे देखती हैं?

उत्तर – आजकल सामाजिक विषयों पर रचनाएँ और आलेख खूब लिखे जा रहे हैं, पर अधिकतर में केवल likes और सब्सक्राइब का खेल लगता है। स्तर खोखला होता जा रहा है। कविता भी वाक्यों की तरह रह गई है। जबकि महान कविता का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ‘रश्मिरथी’ का प्रभाव कितने मानस पटल पर हुआ है। भक्ति, वीर रस, देशभक्ति, श्रृंगार – हर कविता-ग़ज़ल का असर पड़ता है। कई बार अच्छी कविता स्वास्थ्य भी ठीक कर देती है।

प्रश्न – स्वास्थ्य-जागरूकता के लिए क्या कार्य करती हैं?

उत्तर – मैं देश के मुद्दों और स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी देने के लिए रेडियो, टीवी एवं संगोष्ठियों में जाती हूँ। गाजियाबाद के जिला अस्पताल में सरकारी चिकित्सक के रूप में कार्यरत हूँ। मेरी पोस्टिंग एक गाँव में है। वहाँ महिलाओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं सहित सभी तरह के मरीज़ों को देखती हूँ।

प्रश्न -. ग्रामीण क्षेत्रों में आपके मुख्य उद्देश्य क्या रहते हैं?

उत्तर – स्वास्थ्य कैंप लगाना, हाइजीन और स्कूली शिक्षा के लिए प्रेरित करना मुख्य काम है। सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करती हूँ। एनीमिया, टीबी, कैंसर, मानसिक स्वास्थ्य पर कई कैंप किए हैं। ग्रामीण महिलाओं को एनीमिया, कैल्शियम-आयरन की जरूरत, सैनेटरी पैड्स के इस्तेमाल, संस्थागत प्रसव, स्तनपान एवं टीकाकरण की उपयोगिता समझाना और उसे लागू कराना मेरा उद्देश्य रहता है।

प्रश्न – . आम लोगों को स्वास्थ्य के लिए क्या सलाह देंगी?

उत्तर – समाज में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी के लिए लोगों को अपने निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जरूर जाना चाहिए। अपने BP/रक्तचाप, डायबिटीज की स्क्रीनिंग, सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन आदि पर ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न – . आपके प्रिय कवि कौन हैं? कविता में संवाद की क्या भूमिका है?*

उत्तर – मैथिलीशरण गुप्त, महाश्वेता देवी और निराला जी मेरे प्रिय कवि और लेखक हैं। कविता में संवाद की बड़ी भूमिका होती है। संवाद मानस पटल पर अंकित हो जाते हैं।

प्रश्न – 6. एलोपैथी दवाओं को लेकर क्या सावधानी बरतनी चाहिए।
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उत्तर – एलोपैथी दवाई हमेशा चिकित्सक के परामर्श से ही लेनी चाहिए। नुकसान तब अधिक होता है जब उनका सेवन उचित रूप से नहीं होता। इससे नए रोग जन्म ले लेते हैं, साइड इफेक्ट्स होने लगते हैं। लीवर-किडनी पर दुष्प्रभाव हो जाता है।

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