मानव जीवन: विकास की जीवंत कहानी

चार्ल्स डार्विन दिवस-12 फरवरी पर विशेष )

 

*राजू बोहरा / वरिष्ठ संवाददाता*
नई दिल्ली। डार्विन दिवस प्रतिवर्ष 12 फरवरी को विकासवाद के जनक चार्ल्स डार्विन के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर विज्ञान, विकासवाद और प्राकृतिक चयन के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया जाता है। डार्विन ने वर्ष 1859 में प्रकाशित अपनी पुस्तक “द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़” के माध्यम से जीव-जगत और मानव विकास को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

डार्विन के अनुसार सभी जीवों की उत्पत्ति समान पूर्वजों से हुई तथा प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया के तहत विभिन्न प्रजातियों का विकास हुआ। उनके विचारों ने मानव उत्पत्ति को समझने की दिशा में नई सोच को जन्म दिया।

इस विषय पर भारतीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभाकर राव चावरे ने 21वीं सदी में मानव विकास को लेकर एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने ऑटो जेनेटिक थ्योरी ऑफ इवोल्यूशन का प्रतिपादन करते हुए डार्विन के वानर से मानव विकास के सिद्धांत से असहमति जताई। लगभग 40 वर्षों के शोध के बाद उनकी पुस्तक “साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग” वर्ष 2012 में प्रकाशित हुई, जिसका उल्लेख इंडियन जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च में किया गया।
डॉ. चावरे न केवल वैज्ञानिक बल्कि समाजसेवी भी थे। उन्होंने टेक्निकल प्रोफेशनल एजुकेशन इन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उनके निधन के बाद संस्था उनके सुपुत्र बलवंत चावरे के नेतृत्व में संचालित हो रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button