संस्मरण:आचार्य निशांतकेतु बिंदेश्वर पाठक के मामा थे!
राजीव कुमार झा
उन दिनों मैं प्रकाशन संस्थान में हरिश्चंद्र शर्मा के यहां काम करता था और एक दिन आचार्य निशांत केतु जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी को नीतीश कुमार जी ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है। मैंने उनको इसके लिए बधाई दिया। उन्होंने कहा कि पटना जाने पर आप उनसे मिल सकते हैं। शुभदा पांडे काफी दिनों तक बिहार में कला संस्कृति और युवा मामलों के विभाग में मंत्री रहीं। आचार्य निशांत केतु के देहावसान के बारे में मुझे आज फेसबुक से पता चला। पालम विहार में उनसे उनके घर पर मेरी भेंट आज से पंद्रह-बीस साल पहले हुई थी और उस समय भी वह बीमार थे। शायद उन्होंने अपना आपरेशन करवाया था। वह सुलभ इंटरनेशनल की अपनी साहित्यिक पत्रिका चक्रवाक में काम करने के लिए किसी साहित्यिक आदमी की तलाश में थे। उधर पालम विहार में रहने के लिए मेरे पास कोई जगह नहीं थी और दिल्ली के लक्ष्मी नगर से रोज़ पालम विहार जाकर काम करना संभव नहीं था। निशांत केतु जी
भारतीय ज्ञानपीठ में जब मैं काम करता था तो उस वक्त भी कभी कभार फोन किया करते थे और ज्ञानपीठ
में प्रकाशन के लिए भेजे गए अपने उपन्यासों के बारे में पूछताछ किया करते थे। मुझे वहां के लोग इस बारे में कोई जानकारी नहीं देते थे इसलिए उनको इस बारे में मैं कभी कुछ बता नहीं पाया। ज्ञानपीठ पर वह खफा रहते थे। उन्होंने मुझे कहा कि अब तो अमिताभ बच्चन इस संस्था में पुरस्कार अर्पण के लिए आमंत्रित किए जाते हैं। साहित्य और लेखकों से इस संस्था का आखिर क्या संबंध यह गया है? ज्ञानपीठ से उनकी किताबों के प्रकाशन के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं दे पाया था। पालम विहार स्थित उनके घर से जब मैं आ रहा था तो उन्होंने अपनी लिखी काफी किताबें मुझे भेंट स्वरूप दिया । इनमें जिस्म के छिलके और याज्ञवल्क्य इन दो पुस्तकों को आज भी अपनी किताबों की आलमारी में मैं देखता हूं। उन्होंने चक्रवाक के पुराने अंक भी मुझे भेंट में दिया था। निशांतकेतु जी
बिंदेश्वर पाठक के मामा थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।


