मर गया सिपाही लेकिन रैली की धुन में कानपुर के नेताओं ने नहीं दिया एंबुलेंस को रास्ता
सुनील बाजपेई
कानपुर। रैली में हुई भीड़ के मद में चूर कानपुर के नेताओं की लापरवाही ने एक सिपाही की असमय जान ले ली। डंपर की टक्कर से घायल सिपाही को इलाज के लिए परिजन एंबुलेंस से अस्पताल लिए जा रहे थे। तभी एम्बुलेंस रैली की भीड़ में फंस गई सिपाही का पिता लगातार चिल्लाता रहा लेकिन रैली में शामिल किसी भी नेता ने उसकी नहीं सुनी, जिसके फल स्वरुप अस्पताल पहुंचने के पहले ही सिपाही की मौत हो गई। मामला भाजपा की लोकतंत्र बचाओ रैली से जुड़ा हुआ है।
प्राप्त विवरण के मुताबिक फतेहपुर में डंपर की टक्कर से गंभीर रूप से घायल अंबेडकरनगर में तैनात सिपाही प्रांशु सचान को एंबुलेंस से हैलट अस्पताल लाया जा रहा था। इसी दौरान टाटमिल चौराहे पर एंबुलेंस करीब डेढ़ से दो घंटे तक जाम में फंसी रही। बेबस पिता रास्ते में लोगों और पुलिस के सामने हाथ जोड़कर बेटे की जान बख्शने की गुहार लगाते रहे, लेकिन हैलट पहुंचने से पहले ही गंभीर रूप से घायल इकलौते सिपाही बेटे ने एंबुलेंस में ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
पिता के मुताबिक डॉक्टरों ने कहा, “सॉरी दादा, आप लाने में देर कर चुके हैं।” यह सुनकर पिता बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़े। फिलहाल आज गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव मोतीपुर गांव ले जाया गया, जहां पुलिस विभाग की ओर से अंतिम सलामी दी जाएगी और इसके बाद अंतिम संस्कार होगा।
दुखद यह भी है कि रैली में शामिल कोई भी नेता सिपाही के परिजनों को सांत्वना देने के लिए भी नहीं पहुंचा। वैसे चर्चा का विषय बनी यह घटना यहां की पहली नहीं है। इसके पहले भी इसी तरह से जाम में फंसकर और भी कई लोग अपनी जान गवा चुके हैं।


