बादाम के छिलके पर उकेरी १२ मिलीमीटर की माँ सरस्वती: नबद्वीप के कलाकार ने अपने ही पुराने रिकॉर्ड तोड़े

 

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अजित प्रसाद,नबद्वीप (नदिया, पश्चिम बंगाल ) :”रिकॉर्ड बनते ही हैं टूटने के लिए” – इस कहावत को सच कर दिखाया है नदिया जिले के नबद्वीप के कलाकार गौतम साहा ने। अपनी उंगलियों के जादू से उन्होंने एक मामूली बादाम के छिलके के भीतर मात्र १२ मिलीमीटर की देवी सरस्वती की अत्यंत सूक्ष्म और सुंदर मूर्ति बनाकर सबको हैरान कर दिया है। नबद्वीपके प्रतापनगर निवासी ५७ वर्षीय गौतम साहा पेशे से एक चित्रकला शिक्षक (Drawing Teacher) हैं। उन्होंने मिट्टी और रंगों के मेल से पिछले १५ दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इस लघु कृति को तैयार किया है। गौतम बाबू ने बताया कि पिछले वर्षों में उन्होंने अनाज के दानों पर कलाकृतियां बनाई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने बादाम के छिलके का चयन कर अपने ही पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

एक सुसंस्कृत परिवार से ताल्लुक रखने वाले गौतम साहा ने इस सूक्ष्म कला (Micro Art) की शुरुआत लॉकडाउन के दौरान की थी। इससे पहले वे चावल के दानों, मूंग की दाल, चौक और धान पर माँ काली, श्री चैतन्य महाप्रभु और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी महान विभूतियों की आकृतियां उकेर चुके हैं। उनके घर के आंगन में सीमेंट से बनी महापुरुषों की मूर्तियां किसी खुले संग्रहालय (Open Museum) से कम नहीं लगतीं।कलाकार का कहना है कि सूक्ष्म कला के अभ्यास से उन्हें मानसिक शांति मिलती है और अवसाद से मुक्ति मिली है। हालांकि, उन्हें इस बात का मलाल है कि स्थानीय स्तर पर सम्मान मिलने के बावजूद अब तक उन्हें कोई ठोस सरकारी या आर्थिक सहायता नहीं मिली है। उन्होंने इच्छा जताई है कि:उनकी इन कलाकृतियों को किसी संग्रहालय (Museum) में जगह मिले।यदि कोई युवा इस सूक्ष्म कला को सीखना चाहे, तो वे उसे नि:शुल्क सिखाने को तैयार हैं।नबद्वीप, जिसे कभी ‘पूर्व का ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता था, वहां के एक कोने में छिपी यह प्रतिभा आज भी एक उचित मंच और प्रोत्साहन की तलाश में है।

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