दुनिया को गुमराह करने में जुटा पाकिस्तान
सिंधु घाटी सभ्यता के सहारे पानी पर ठोका दावा
-बिलावल ने खेला सभ्यता का कार्डए युद्ध की दी धमकी
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। पाकिस्तान अब खुद को सिंधु नदी का असली मालिक साबित करने के लिए इतिहास को ढाल बना रहा है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को लेकर पाकिस्तान का यह नया नैरेटिव कोई सांस्कृतिक प्रेम नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ एक सोची.समझी अंतरराष्ट्रीय साजिश है। दरअसल पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है, जिससे पाकिस्तान बिलबिला उठा है।
पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 बेगुनाह नागरिकों की हत्या का बदला भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर लिया था। उसी दौरान सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। भारत के इस कड़े फैसले के ठीक कुछ महीने बाद, जून 2025 में पाकिस्तान ने आनन.फानन में मोहनजोदड़ो में नए सिरे से खुदाई शुरू कर दी। बता दें कि 1965 के बाद से इस ऐतिहासिक स्थल को लगभग अछूता छोड़ दिया गया था। लेकिन भारत की पानी की नाकेबंदी से घबरा पाकिस्तान को अचानक अपनी इस प्राचीन विरासत की याद आ गई।
पाकिस्तान की इस चाल को वहां के नेताओं के बयानों से आसानी से समझा जा सकता है। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत के विरोध में सीधे तौर पर सभ्यतागत दावा ठोक दिया है। बिलावल ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तर्क दिया कि चूंकि मोहनजोदड़ो पाकिस्तान में है। इसलि, पाकिस्तान ही सिंधु नदी का असली संरक्षक और रक्षक है और इस पानी पर उसका ऐतिहासिक अधिकार है। वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ समेत कई नेता भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और पानी के मुद्दे पर युद्ध तक की धमकियां दे रहे हैं।
पाकिस्तान की हाइब्रिड ;नागरिक.सैन्य. सरकार और वहां के बुद्धिजीवी अब केवल सिंधु घाटी ही नहीं, बल्कि तक्षशिला और गांधार जैसी इस्लाम.पूर्व बौद्ध और हिंदू विरासतों को भी अपनी राष्ट्रीय पहचान के रूप में चमकाने में जुटे हैं। भारत को पानी के मोर्चे पर घेरने और खुद को इस जमीन का मूल निवासी साबित करने के लिए पाकिस्तान अपने ही पुराने इस्लामिक इतिहास के नैरेटिव को पीछे छोड़ने को तैयार हो गया है।
