किसानों की जटिल समस्याओं का निदान करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी: सर्वेश कुमार

 

नन्दकिशोर दास

बेगूसराय ब्यूरो। कावर महापंचायत के किसानों ने शनिवार को तीसरे दिन आमरण अनशन पर बैठे महापंचायत के सदस्य बल्लभ बादशाह उर्फ जुगनू से मिलने दरभंगा स्नातक एमएलसी सर्वेश कुमार कावर से जुड़े किसानों के जटिल मुद्दे को लेकर बातचीत की। आमरण अनशन पर बैठे सदस्य अपनी प्रमुख समस्याओं को एमएलसी सर्वेश कुमार के समक्ष रखते हुए जल्द-से-जल्द किसानों के महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान निकालने के लिए प्रमुख समस्याएं रखी। स्नातक एमएलसी सर्वेश कुमार ने कहा कि यह किसानों का जायज आंदोलन है। मैं भी किसान परिवार से आता हूं और किसान की हर जटिल समस्याओं को समझता हूं। किसानों की चिंता प्रमुख रूप से सरकार व शासन-प्रशासन को करने की आवश्यकता है। जिसमें मैं भी एक सरकार का अंग हूं। इसी नाते मैं मंझौल शताब्दी मैदान में महापंचायत के द्वारा आमरण अनशन स्थल पर पहुंचकर समस्याओं से अवगत होते हुए हर मुद्दे के साथ खड़ा हूं। जल्द-से-जल्द किसानों की समस्याओं का समाधान करने का हरसंभव प्रयास करूंगा। आज मैं आमरण अनशन को एक सार्थक रूप से वार्ता कर जूस पिलाकर खत्म करवा रहा हूं। मगर मेरी नैतिक जिम्मेदारी रहेगी आगे भी मैं किसान के हर समस्याओं एवं दुख-सुख में साथ खड़ा रहूंगा। महापंचायत के सदस्य विजय सिंह, शिशुपाल सिंह, शालिग्राम सिंह, अमित कुमार सिंह गप्पू, महेश भारती, संजीव कुमार, अंगद कुमार, अनुराग कुमार, अजय कुमार चुलबुल, प्रभात भारती ने कहा कि यह आंदोलन किसानों के लिए बेटी-रोटी का सवाल बन गई है। किसान कावर की समस्याओं को लेकर आगे भी विभिन्न तरह के उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। इससे पहले सरकार व शासन-प्रशासन जल्द-से-जल्द किसान की जटिल समस्याओं का निदान करें, नहीं तो किसान सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए विवश होंगे। खड़गनारायण सिंह, मनोज सिंह, अनमोल शरण, लल्लू सिंह, कुमार अनिल, मुकेश कुमार एवं छात्र नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि हमारा देश भारत कृषि प्रधान देश है। किसान के हित की रक्षा करना वर्तमान सरकार व शासन-प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है, जिससे आज सरकार व प्रशासन पल्ला झाड़ते दिख रही है। हम सभी किसान आज सड़क पर बेटी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मौके पर श्यामजी, फूकरू, अमित कुमार सिंह गप्पू, कृष्णमोहन, सोनू, अनमोल शरण, मनोज भारती, शालिग्राम सिंह, विजय सिंह, लल्लू सिंह, धीरज भारती, धीरज, रविशंकर, प्रियांशु, चुलबुल, रामबाबू सिंह, अविनाश, कन्हैया आदि सैकड़ों किसान उपस्थित थे।

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