केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने नमामि गंगे मिशन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

गंगा के निरंतर और सतत प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए ई-फ्लो मॉनिटरिंग सिस्टम को किया लॉन्च

 

नई दिल्ली, 13 जून 2024: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल ने नई सरकार के गठन के तुरंत बाद नमामि गंगे मिशन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी भी मौजूद रहे। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। समीक्षा के दौरान, अविरल गंगा घटक के हिस्से के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा विकसित ई-फ्लो मॉनिटरिंग सिस्टम को भी माननीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।

ई-फ्लो मॉनिटरिंग सिस्टम प्रयाग पोर्टल का एक अभिन्न अंग है, जो ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से परियोजनाओं, नदी जल गुणवत्ता आदि की योजना और निगरानी के लिए एक रियल टाइम निगरानी केंद्र है। इस पोर्टल में ऑनलाइन डैशबोर्ड जैसे गंगा तरंग पोर्टल, ऑनलाइन ड्रोन डेटा के जरिए जाजमऊ संयंत्र, पीएमटी उपकरण डैशबोर्ड, गंगा जिला प्रदर्शन निगरानी प्रणाली आदि शामिल हैं।

माननीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल ने नमामि गंगे मिशन के तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों के लिए चल रही परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए अभिनव समाधानों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और वर्तमान में नदी कायाकल्प कार्यक्रमों से वंचित क्षेत्रों के लिए नई रणनीति और दृष्टिकोण विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई।

कार्यक्रम के दौरान, श्री पाटिल ने नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा के अविरल प्रवाह और स्वच्छता को सुनिश्चित करने के लिए चलाई जा रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की टीम के समर्पण और अथक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कानपुर के जाजमऊ क्लस्टर में हाल ही में चालू किए गए 20 एमएलडी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के बारे में जानकारी ली। यह सीईटीपी टेनरी उद्योगों के लिए सबसे बड़े प्लांट में से एक है, जो कॉमन क्रोम रिकवरी यूनिट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम सहित आधुनिक तकनीकों से लैस है।

समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों के जल की वास्तविक समय पर विश्लेषण और नमामि गंगे कार्यक्रम की गतिविधियों की केंद्रीय स्तर पर निगरानी की सुविधा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के प्रदर्शन की निगरानी ऑनलाइन सतत प्रवाह निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) के माध्यम से की जाती है, जिससे सुनिश्चित होता है कि सभी एसटीपी अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार काम करें। नदी के पानी की गुणवत्ता की निगरानी भी विभिन्न स्थानों पर की जाती है।
ई-फ्लो मॉनिटरिंग सिस्टम की शुरुआत गंगा नदी के निरंतर और सतत प्रवाह को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय जल आयोग की तिमाही रिपोर्टों से डेटा का उपयोग करते हुए, यह प्रणाली गंगा की मुख्य धारा के साथ 11 परियोजनाओं में इन-फ्लो, आउट-फ्लो और अनिवार्य ई-फ्लो जैसे प्रमुख मापदंडों को ट्रैक करेगी। यह पहल हमारे देश की जीवन रेखा गंगा नदी को संरक्षित करने के प्रयास में एक मील का पत्थर है।

भारत सरकार ने 9 अक्टूबर 2018 को जारी अपने राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से गंगा नदी के विभिन्न हिस्सों के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) को पूरे वर्ष बनाए रखने का आदेश दिया था। इसी अधिसूचना में, एनएमसीजी ने नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने, जलीय जीवन की सुरक्षा और विभिन्न जल उपयोग मांगों के बीच स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रवाह विनिर्देशों को निर्धारित किया है।

ऊपरी गंगा बेसिन से लेकर उसके संगम और उससे आगे तक, ई-फ्लो मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए बेहतर उपाय किए जा रहे हैं, जिससे मौजूदा और भविष्य की दोनों परियोजनाओं को लाभ मिल रहा है। निगरानी और विनियामक तंत्र के साथ, गंगा की पारिस्थितिकी को बेहतर बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जा रहा है।

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