क्या बंद लैपटॉप खोल पाएगा दफ्तरी के काले धन का सच ?

जांच के लिए बुलाया गया फोरेंसिक टीम को, डरे हुए है बिहार बंगाल के व्यापारी

 

कच्चा पक्का के लेनदेन में फंसा है पूरा छापामारी, कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं

– राजनेताओं से लेकर बड़े अधिकारियों का दरबार लगता था यहां

– आज बगले झांक रहे है सभी, कही उनका भी ना खुल जाए भेद

किशनगंज-बिहार/ सिलीगुड़ी: बंगाल के सीमावर्ती बिहार के
किशनगंज शहर के एक प्रमुख उद्योगपति और प्रतिष्ठित कारोबारी दफ्तरी ग्रुप के ठिकानों पर केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी तीसरे दिन रविवार को भी जारी है। यक्ष प्रश्न है कि काले धन का सच क्या मिले लैपटॉप से मिल पाएगा? क्या वास्तव में दफ्तरी ग्रुप ने बड़ी मात्रा में वित्तीय लेनदेन के माध्यम से काले धन को सादा करने में लगाया है। इसका उत्तर तो जांच टीम की कार्रवाई खत्म होने और पत्रकारों को बताने के बाद या फिर दफ्तरी ग्रुप के कोई कर्ता सामने आकर कुछ बोले तब ही सकता है। सच चाहे जो हो लेकिन एक बात है कि इस छापामारी से व्यापारी से लेकर राजनेता और कई बड़े अधिकारी टेंशन में है। सभी डर है कि कही उनका नाम इस छापामारी से ना जुड़ जाए। इसलिए सभी गांधी जी के तीन बंदर बने हुए है। शुक्रवार सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों से चल रही है। मिल रही जानकारी के अनुसार बीते रात केवल तीन से चार घंटे के विराम के बाद एक बार फिर से जांच शुरू हो गई है।शुक्रवार से शुरू हुई इस कार्रवाई में आयकर विभाग की टीमें पटना और अन्य स्थानों से किशनगंज पहुंची थीं और एक साथ 24 से ज्यादा ठिकानों पर जांच शुरू की थी। लगातार 72 घंटे से चल रही इस छापेमारी की चर्चा पूरे शहर में जोरों पर है। चौक-चौराहों पर लोग इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं। एजेंसी की टीमें भारी पुलिस बल के साथ उद्योगपति के आवास और कार्यालयों पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। एजेंसी कथित अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूतों की तलाश कर रही है। आश्चर्य की बात है कि दफ्तरी ग्रुप का राजनेताओं, बड़े अधिकारियों यहां तक ज्यूडिशियरी में भी अच्छी खासी पकड़ थी। लोगों का कहना है कि किशनगंज के भविष्य तय करने के लिए जुगल किशोर तोषनीवाल और राज करण दफ्तरी के यहां ऐसे नेता और अधिकारियों का दरबार लगता था। आज उन्हीं नेताओं और अधिकारियों के घर में सन्नाटा है। रविवार को भी पश्चिम बंगाल के कुछ ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। शनिवार देर शाम इस मामले में नया मोड़ आया था। जब किशनगंज से 25 किलोमीटर दूर खारूदह खरखरी में दफ्तरी ग्रुप के अकाउंटेंट गंगा दास से पूछताछ के बाद टीम को आयकर कुछ अहम सुराग मिले। गंगा दास ने जांच टीम को एक लैपटॉप के बारे में बताया जिसे आनन फानन हेड ऑफिस से बरामद कर लिया गया। उसे शनिवार रात किशनगंज के भगतटोली रोड स्थित दफ्तरी के मुख्य ऑफिस लाया गया। इसकी जांच में विभाग कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। जांच के लिए बुलाया गया है फोरेंसिक टीम: छापामारी टीम अब इस लैपटॉप से महत्वपूर्ण जानकारी निकालने में जुटी है। बताया जा रहा है कि दस्तावेजों की बारीकी से जांच के लिए फोरेंसिक टीम और विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है। इसके साथ ही बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन की भी गहन पड़ताल की जा रही है। छापेमारी के दौरान मीडियाकर्मियों ने घटनास्थल का वीडियो बनाने की कोशिश की। हालांकि पुलिस और एजेंसी के अधिकारियों ने फुटेज को डिलीट करवा दिया। स्थानीय लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मान रहे हैं। केंद्रीय एजेंसी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह छापेमारी स्थानीय कारोबारी समुदाय और पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। आपको पता है कौन है जयकरण दफ्तरी: जब मैं 1995 में दैनिक हिंदुस्तान के लिए बिहार से पत्रकारिता करता था तो दफ्तरी के पोठिया स्थित चाय बागान में बड़ा विवाद उत्पन्न हो गया था। उसकी रिपोर्टिंग मेरे द्वारा की गई थी। इसी क्रम में जब किशनगंज उनके प्रतिष्ठान में गया तो बैठकर बेबाकी से बात हुई थी। बताया था कि कैसे उनके कुलदेवी के मंदिर में सफेद चूहे आते है? बताया था कि जयकरण दफ्तरी के पूर्वज आजादी से पहले राजस्थान के चुरू जिले से किशनगंज आए थे। उनके परदादा ने शहर के नेमचंद रोड पर कपड़े के व्यवसाय की दुकान खिला था। 90 के दशक में उन्होंने 5 एकड़ जमीन पर चाय के व्यवसाय में कदम रखा और आज वे लगभग 500 एकड़ से अधिक की चाय बागान हैं। कांग्रेस के एमजे अकबर हो या कोई राज्य के बड़े नेता सबका ठिकाना यही होता था। भाजपा के सिकंदर सिंह हो या पूर्व मंत्री तस्लीमुद्दीन सबके साथ इनके अच्छे संबंध रहे है। उनका एक टी प्रोसेसिंग यूनिट भी है, जो देशभर में ‘राजबाड़ी चाय’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसके अलावा किशनगंज में उनके कई मॉल और होंडा मोटरसाइकिल का शोरूम भी है। वे गोदरेज जैसी कई कंपनियों के अधिकृत डीलर भी हैं । किशनगंज के अलावा कटिहार में भी उनके मॉल हैं। लोगों का कहना है कि उनके कई रिसॉर्ट भी हैं, जहां छापेमारी चल रही है। वे किशनगंज में एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी के रूप में जाने जाते हैं। अब देखना है कि यह छापामारी उन्हें बदनाम करने के लिए किया गया है या काले धन के सच को उजागर करने के लिए किया जा रहा है?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button