महिला हितैषी ग्राम पंचायतें आधी आबादी को नीति निर्माण से जोड़ने का सशक्त माध्यम : दीपक प्रकाश

 

_रमेश ठाकुर – पश्चिम चंपारण,बिहार_ महिला एवं बालिका हितैषी ग्राम पंचायतों का विकास केवल एक योजना नहीं, बल्कि राज्य की आधी आबादी को नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी देने का सामूहिक प्रयास है। यह बात पंचायती राज विभाग, बिहार के माननीय मंत्री दीपक प्रकाश ने बुधवार को कही।

वे पंचायती राज विभाग, बिहार, यूएनएफपीए (UNFPA) एवं PCI-India के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय मंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यशाला का विषय बिहार में महिला एवं बालिका हितैषी ग्राम पंचायतों के माध्यम से लैंगिक रूप से उत्तरदायी शासन को आगे बढ़ाना था।

मंत्री ने कहा कि सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक स्तर पर लैंगिक भेदभाव को समाप्त किए बिना महिलाओं का सशक्तिकरण संभव नहीं है। पंचायत जन-प्रतिनिधियों की भूमिका इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि राज्य में 38 ग्राम पंचायतें मॉडल महिला हितैषी ग्राम पंचायत के रूप में कार्य कर रही हैं, जहाँ नियमित महिला ग्राम सभाओं के माध्यम से महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत महिला जन-प्रतिनिधियों एवं कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वर्ष 2005 में पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद आज राज्य की अधिकांश ग्राम पंचायतें महिला नेतृत्व में विकास की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। जीविका दीदियों की भूमिका को भी मंत्री ने महिला सशक्तिकरण में अहम बताया।

कार्यशाला में शेखपुरा जिले की गगरी ग्राम पंचायत की मुखिया ललिता देवी एवं कसर ग्राम पंचायत की मुखिया सुजाता देवी ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार, प्रो. डॉ. एन. के. अग्रवाल, UNFPA एवं PCI-India के प्रतिनिधि सहित विभागीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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