35वां नेपाली भाषा दिवस भव्य समारोह के साथ संपन्न
गंगटोक, 20 अगस्त 2026। नेपाली साहित्य परिषद, सिक्किम के आयोजन में 35वां नेपाली भाषा दिवस गुरुवार को परिषद के प्रेक्षागृह में विविध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सम्मान समारोह के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष हरि ढुंगेल ने की, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार तथा सिक्किम अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एस. आर. सुब्बा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। असम से प्रबुद्ध साहित्यकार के. बी. नेपाली विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए।
कार्यक्रम में सिक्किम के वरिष्ठ साहित्यकारों रुद्र पौड्याल, शंकरदेव ढकाल, पेम्पा तामांग, चुड़ामणि खतिवड़ा, प्रद्युम्न श्रेष्ठ, भीम ठटाल, भक्ति बस्नेत सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, रचनाकार, भाषा अभियंता तथा नेपाली भाषा और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
समारोह का शुभारंभ नेपाली साहित्य परिषद के महासचिव भीम रावत के स्वागत वक्तव्य से हुआ। इसके बाद दीपशिखा राई और स्तुति काफ्ले ने कविता पाठ किया। वृहस्पति प्रसाईं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा इन्लाइटन्ट एकेडमी के विद्यार्थियों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार उषा शर्मा ने नेपाली भाषा की संवैधानिक मान्यता और वर्तमान स्थिति पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने नेपाली भाषा के विकास, संरक्षण और वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
समारोह में सिक्किम विश्वविद्यालय की वर्ष 2025 की अंतिम सत्रांत परीक्षा में नेपाली विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली मेधावी छात्रा रचना राई को ‘प्रेमलाल स्मृति शैक्षिक पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। वहीं, सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ सामाजिक अभियंता सागर पराजुली का अभिनंदन किया गया।
इसी अवसर पर वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘कञ्चनजंघा अगम स्मृति पुरस्कार’ असम के लामडिंग निवासी प्रबुद्ध साहित्यकार के. बी. नेपाली को प्रदान किया गया। नेपाली भाषा और साहित्य के विकास में उनके दीर्घकालीन एवं विशिष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया। पुरस्कार के तहत उन्हें एक लाख रुपये की नकद राशि, सम्मान-पत्र तथा अंगवस्त्र प्रदान किया गया।
सम्मान ग्रहण करते हुए के. बी. नेपाली ने नेपाली साहित्य परिषद, सिक्किम के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें नेपाली भाषा और साहित्य की सेवा में और अधिक सक्रिय होकर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने नेपाली भाषी समुदाय से एकजुट होकर आपसी एकता और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भाषा दिवस समारोह में साहित्यकार टीका ढुंगेल की कृति ‘कलमका प्रतिबिम्बहरू’, डॉ. बी. सी. तामांग की ‘शरद रमाउने आँगन’ तथा कथाकार कमल सापकोटा की लघुकथा संग्रह ‘परिवेशका चित्रणहरू’ का विधिवत लोकार्पण भी किया गया। इससे कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह तक सीमित न रहकर साहित्यिक सृजन और प्रकाशन को भी प्रोत्साहित करने वाला मंच बना।
मुख्य अतिथि एस. आर. सुब्बा ने अपने संबोधन में नेपाली भाषा आंदोलन के लंबे और गौरवपूर्ण इतिहास को याद किया। उन्होंने नेपाली भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए योगदान देने वाले भाषा संग्रामियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। साथ ही उन्होंने नेपाली साहित्य परिषद द्वारा भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
अध्यक्षीय संबोधन में हरि ढुंगेल ने कहा कि नेपाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने 20 अगस्त को सरकारी अवकाश घोषित कर नेपाली भाषा दिवस को संस्थागत सम्मान देने के लिए सिक्किम सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सिक्किम के मुख्यमंत्री की भाषा के प्रति सम्मान और सकारात्मक सोच की भी सराहना की।
हरि ढुंगेल ने चिंता जताई कि संवैधानिक मान्यता से पहले नेपाली भाषा के पक्ष में विकसित संगठित विचार, सामूहिक चेतना और एकता की भावना अब धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। उन्होंने गुटबाजी और एक-दूसरे को पीछे खींचने की प्रवृत्ति छोड़कर सहयोग और सामूहिकता की संस्कृति विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नेपाली केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि संपर्क की महत्वपूर्ण भाषा भी है। इसलिए राज्य के साइनबोर्ड, शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजी के साथ नेपाली भाषा के प्रयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक मान्यता तभी सार्थक होगी, जब नेपाली भाषा का व्यवहारिक उपयोग, संरक्षण और विस्तार सुनिश्चित किया जाए।
समारोह के दौरान 212वें भानु जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन तुलसी घिमिरे ने किया, जबकि डी. आर. गिरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस प्रकार 35वां नेपाली भाषा दिवस साहित्य, संस्कृति, सम्मान और भाषा संरक्षण के संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।




