मां काली की प्रतिमा खंडित करने वाला गिरफ्तार, इसको लेकर राजनीति चरम पर

भाजपा टीएमसी आमने सामने, माहौल खराब नहीं हो इसके लिए पुलिस तत्पर

 

अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के हारवुड पॉइंट कोस्टल थाना क्षेत्र के अंतर्गत उत्तर चंदननगर में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब एक स्थानीय मंदिर के भीतर काली माता की मूर्ति खंडित मिली। काकद्वीप में कथित तौर पर काली प्रतिमा को तोड़े जाने की घटना की आंच रानीगंज में भी महसूस की गयी. गुरुवार को रानीगंज प्रखंड विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के सदस्यों ने सड़क पर उतर कर उक्त घटना के खिलाफ जोरदार प्रतिवाद जताया और मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाये। इस घटना ने राजनीतिक रंग ले लिया और नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अमित मालवीय ने ट्विटर के बाद अब एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पुलिस ने मां काली की मूर्ति को पुलिस वैन में बंद करके ले जाया। उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया और प्रशासन पर इसे दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। मालवीय ने कहा कि पुलिस ने शुरुआत में ग्रामीणों को धमकाया और मंदिर के फाटक बंद कर दिए। लेकिन स्थानीय लोगों के उग्र विरोध के बाद उन्हें फाटक फिर से खोलने पड़े। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और उनकी पुलिस ने सारी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने हिंदू भक्तों से मूर्ति छीन ली, उसे अपमानजनक तरीके से फेंक दिया और फिर भक्तों पर लाठीचार्ज किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस मुहर्रम के दौरान ताजिया के साथ भी ऐसा करने की हिम्मत करेगी। मालवीय ने इसे हिंदू विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया।वही दार्जिलिंग के सांसद राजू विष्ट ने कहा कि काली मां का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान।उन्होंने कहा कि इस मानसिकता वाले लोगों को सरकार प्रश्रय दे रही है। विहिप के सदस्यों की शिकायत है कि एक तो काकद्वीप में देवी के विग्रह को शरारती तत्वों ने तोड़ा, ऊपर से विग्रह के क्षतिग्रस्त हिस्से को वहां की पुलिस बंदियों के प्रिजन वैन में लेकर गयी।विहिप के मुताबिक इससे पुलिस की संवेदनहीनता का पता चलता है. उक्त घटना पर विहिप ने तीव्र विरोध जताया. गुरुवार को रानीगंज प्रखंड विहिप कार्यकर्ताओं ने शहर के एक काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर काकद्वीप की घटना पर भारी नाराजगी जतायी और मामले में शरारती तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की.।विहिप के आसनसोल जिला असिस्टेंट सेक्रेटरी, तेज प्रताप सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि परसों दक्षिण 24 परगना जिले में जो घटना हुई, उसकी जितनी निंदा की जाये कम है। आरोप लगाया कि असामाजिक तत्वों ने काली प्रतिमा को खंडित किया और ऐसे तत्वों पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस मां काली की टूटी प्रतिमा को अपने पिजन वैन में उठा कर ले गयी। तेज प्रताप सिंह ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई को ‘एकतरफा’ बताते हुए कहा कि इससे साफ है कि पुलिस असल अपराधियों को पकड़ना नहीं चाहती बल्कि बस मामले को रफा-दफा करना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुओं के आराध्य का अपमान करने की यह नयी घटना नहीं है। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के आसनसोल जिला असिस्टेंट सेक्रेटरी तेज प्रताप सिंह के अलावा, विश्व हिंदू परिषद के रानीगंज प्रखंड के सचिव विश्वजीत गोराई, बजरंग दल के संदीप गोस्वामी, राहुल सिंह, रोहन सिंह, बिहू मंडल, प्रजापति निहाल राम, आदित्य चौहान, पिंटू यादव आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे। वहीं दूसरी ओर इस घटना के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सुंदरवन के पुलिस अधीक्षक कोटेश्वर राव ने बताया कि यह घटना मंगलवार शाम सूर्यनगर ग्राम पंचायत क्षेत्र के एक मंदिर में हुई, जब आरोपित नारायण हलदार ने कथित रूप से नशे की हालत में प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया। पूछताछ में आरोपित ने अपराध कबूल किया और अपने कृत्य के लिए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर एक टीम भेजी गई और हलदार को गिरफ्तार किया गया। जांच में उसने स्वीकार किया कि घटना के समय वह शराब के नशे में था।।घटना के बाद स्थिति तब बिगड़ गई जब कुछ बाहरी लोग मौके पर पहुंचे और राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आसपास के गांवों के निवासी एकत्र हो गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
पुलिस अधिकारियों के समझाने की कोशिश पर भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। अराजक स्थिति में पुलिस का लक्ष्य खंडित प्रतिमा की सुरक्षा और मार्ग में फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालना था।पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पत्थरबाजी के दौरान प्रतिमा को किसी और नुकसान से बचाने के लिए हमने उसे पुलिस वैन में सुरक्षित रखा तथा फिर राजमार्ग खाली कराया। पूरी रात गश्त चलती रही और सुबह तक हालात सामान्य कर दिए गए। इस मामले में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं, एक प्रतिमा तोड़फोड़ और दूसरा सड़क जाम करने के आरोप में। अधिकारियों ने कहा कि अभी तक की जांच में किसी भी राजनीतिक साजिश का कोई सबूत नहीं मिला है।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक स्थानीय घटना प्रतीत होती है। हम सभी से अपील करते हैं कि अफवाहों पर विश्वास न करें। मां काली की पवित्रता हमारे लिए सर्वोपरि है, और हम इसे बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएंगे। काकद्वीप क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि सड़क अवरोध में शामिल लोगों की पहचान की जा सके।
घटना के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर हिंदू भावनाओं की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर आरोपित को गिरफ्तार किया और स्थिति को नियंत्रण में रखा।
एक वरिष्ठ तृणमूल नेता ने कहा कि जो लोग इस घटना को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, वे बंगाल की एकता और सौहार्द्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता दोनों का परिचय दिया है।

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