भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित ‘शिवनिवास’ में उमड़ा जनसैलाब; एशिया के दूसरे सबसे बड़े शिवलिंग पर जल अर्पण करेंगे लाखों भक्त  

 

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नदिया (पश्चिम बंगाल) : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नदिया जिले के भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती क्षेत्र कृष्णगंज स्थित ऐतिहासिक शिवनिवास मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। यहाँ एशिया का दूसरा सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित है, जिसकी महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है।

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राजा कृष्णचंद्र ने की थी स्थापना ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना नदिया के राजा कृष्णचंद्र ने की थी। बताया जाता है कि मराठा आक्रमणकारियों (बर्गियों) के डर से राजा कृष्णचंद्र कृष्णनगर छोड़कर शिवनिवास में रहने आए थे। यहाँ उन्होंने तीन मंदिरों की स्थापना की—दो मंदिरों में विशाल शिवलिंग स्थापित हैं और तीसरे मंदिर में प्रभु रामचंद्र और माता सीता की प्रतिमा है।मान्यता और परंपरा लोककथाओं के अनुसार, राजा कृष्णचंद्र ने मन्नत मांगी थी कि यदि वे कुख्यात दस्यु नसरत खां को परास्त कर देते हैं, तो वे शिवरात्रि पर उपवास रखकर विशेष पूजा करेंगे। युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद से ही यहाँ महाशिवरात्रि पर भव्य पूजा की परंपरा चली आ रही है।भक्तों की अटूट आस्था आज महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त पर पूजा अर्चना के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगी हैं।

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कई भक्त कांवड़ में जल लेकर मीलों पैदल चलकर आ रहे हैं।अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए अनेक श्रद्धालु ‘दंडी’ काटते हुए (जमीन पर लेटकर प्रणाम करते हुए) मंदिर पहुँच रहे हैं।श्रावण मास के अंतिम सोमवार की तरह ही महाशिवरात्रि पर भी यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपवास रखकर जलाभिषेक करते हैं।जिले के अन्य प्राचीन मंदिर केवल शिवनिवास ही नहीं, बल्कि नदिया के विभिन्न हिस्सों में लगभग 500 वर्ष पुराने प्राचीन शिव मंदिर स्थित हैं। टेराकोटा की नक्काशी और प्राचीन वास्तुकला से सुसज्जित इन मंदिरों में रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर लाखों पुण्यार्थियों द्वारा जलाभिषेक किया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि भक्तों को दर्शन में कोई असुविधा न हो।

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