न्यायिक प्रतिबंध की परिस्थितियों में नेताओं को अपनी पत्नी के माध्यम से चुनाव की राजनीति से दूर रहना चाहिए।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025
राजीव कुमार झा
लालू प्रसाद के कार्य काल में बिहार के समाज के अपराधीकरण के साथ यहां राजनीति का भी अपराधीकरण हुआ और बिहार से आनंद मोहन, शहाबुद्दीन और सूरजभान सिंह जैसे लोग नेता बनकर संसद की गरिमा को बढ़ाने के लिए जब वहां पहुंचे तो चुनाव आयोग और देश में सत्तारूढ़ तत्कालीन केंद्र सरकार का चिंतित होना स्वाभाविक था और इसलिए चुनाव सुधार कानून के अंतर्गत सजायाफ्ता लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई लेकिन इससे बात नहीं बन पाई और राजनीति में सक्रिय ऐसे नेताओं ने अपनी पत्नियों के मार्फत चुनावों में छद्म भागीदारी को कायम करना शुरू किया और इस प्रकार यह समस्या आज भी बदस्तूर कायम है। बिहार में यह सब राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू हुआ था। पत्नियों के मार्फत राजनीति नहीं होना चाहिए और इसमें अपराध के समावेश से भी समाज को दूर रहना चाहिए लेकिन इसे लेकर लोग चुप बने हुए हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाएं अगर भाग ले रही हैं तो उनको अकेला छोड़ दीजिए। यह फिर उनका मामला है। चुनाव में अपना काम महिला उम्मीदवार निबटा लेंगी। चुनाव में जीत हासिल करने वाली महिलाओं को विधायक के रूप में अपना कामकाज खुद निबटाना पड़ता है। इसमें उनके पतियों की कोई भूमिका नहीं होती है। इसके बावजूद वारिसलीगंज, मोकामा और अन्य स्थानों पर कुछ महिला उम्मीदवारों के पतिगण अपनी पत्नियों के चुनाव लड़ने में संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों में इस कदर संलग्न हैं मानो वह खुद चुनाव लड़ रहे हों। ऐसी महिला उम्मीदवार ज्यादा पढ़ी – लिखी नहीं हैं और चुनाव से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया पर उनके पतिगण ही विचारों को प्रकट करते दिखाई देते हैं। बिहार में यह सब राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू हुआ। इस पर रोक लगाई जाए। ज्यादातर महिला उम्मीदवारों को उनके पतियों ने अपनी नेतागिरी के चक्कर में उम्मीदवार बनाया है। बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर मोकामा सीट से उम्मीदवार वीणा देवी महागठबंधन की उम्मीदवार हैं। यहां न्यायिक प्रतिबंध के दिनों में जदयू उम्मीदवार अनंत कुमार सिंह ने कभी राजद के टिकट से अपनी पत्नी नीलम देवी को उम्मीदवार बनाया था। वह चुनाव जीत भी गयी थीं लेकिन महागठबंधन से रिश्ता तोड़ने के बाद बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के विश्वास मत पर नीलम देवी ने पार्टी अनुशासन से बाहर आकर नीतीश कुमार का साथ दिया था। मोकामा में महागठबंधन की उम्मीदवार सूरजभान सिंह न्यायिक प्रतिबंध से शायद चुनाव मैदान से बाहर हैं। सूरजभान सिंह पहले रामविलास पासवान की पार्टी में नेता थे लेकिन और उन लोगों ने उस पार्टी पर उनके बेटे चिराग पासवान को हटाकर उनके चाचा पशुपति पारस और अन्य सांसदों के साथ कब्जा जमा लिया था लेकिन पिछले संसदीय चुनाव में पशुपति पारस और सूरजभान हार गये और चिराग पासवान की पार्टी ने बिहार में अपनी तमाम सीटों पर जीत दर्ज की थी।




