बंगाल में SIR : अत्यधिक दबाव के विरोध में प्रदर्शन

सीईओ कार्यालय में घुसने का प्रयास

 

पुलिस के साथ हाथापाई,अचानक धरना देने से बिगड़ी स्थिति

अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में शामिल बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLOs) ने सोमवार को काम के कथित अत्यधिक दबाव के विरोध में प्रदर्शन के दौरान यहां सीईओ कार्यालय में घुसने का प्रयास किया और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने सोमवार को कहा कि यदि निर्वाचन आयोग “वास्तव में स्वतंत्र” है, तो उसे बूथ स्तर के अधिकारियों की सुरक्षा करनी चाहिए, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बारे में पारदर्शी होना चाहिए।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने सोमवार को कहा कि यदि निर्वाचन आयोग “वास्तव में स्वतंत्र” है, तो उसे बूथ स्तर के अधिकारियों की सुरक्षा करनी चाहिए, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बारे में पारदर्शी होना चाहिए। बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सदस्यों ने उत्तरी कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से जुलूस निकाला, जिसमें ताले और बेड़ियां लेकर प्रतीकात्मक रूप से उस भवन के मुख्य द्वार को बंद किया गया, जिसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) का कार्यालय स्थित है। शाम को उस समय नाटकीय घटनाक्रम शुरू हो गया जब दस सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें चार बीएलओ और छह शिक्षक या राज्य सरकार के कर्मचारी शामिल थे, अपनी शिकायतें दर्ज कराने सीईओ मनोज अग्रवाल के कार्यालय में दाखिल हुआ। सीईओ की अनुपस्थिति में, उनके अधीनस्थ ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उनका ज्ञापन स्वीकार किया।
अचानक धरना देना शुरू किया: हालांकि, जब प्रतिनिधिमंडल वहां से जा रहा था, तो एक सदस्य ने आरोप लगाया कि रैली में भाग लेने के कारण उसे धमकी भरा संदेश मिला, जिसके बाद समूह ने कार्यालय के अंदर अचानक धरना शुरू कर दिया। हंगामे के बीच, कोलकाता पुलिस के जवानों और सीईओ कार्यालय के सुरक्षा कर्मचारियों ने प्रदर्शनकारियों को उठाकर परिसर से बाहर निकाल दिया। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने मध्य कोलकाता स्थित सीईओ कार्यालय में घुसने के लिए पुलिस अवरोधक तोड़ने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी बीएलओ ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि उन्हें जुलूस निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि “निर्वाचन आयोग ने एसआईआर कवायद के दौरान अत्यधिक और अमानवीय कार्य दबाव की उनकी शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।”
दो साल का काम इतनी जल्दी: एक पदाधिकारी ने दावा किया, “बीएलओ को कम समय में कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है, हालांकि इसी कार्य में आमतौर पर दो साल से अधिक समय लगता है।” समिति ने यह भी आरोप लगाया कि बीएलओ बीमार पड़ रहे हैं और उनमें से दो ने तनाव के कारण आत्महत्या कर ली। समिति ने पूर्व में कहा था कि पारा-शिक्षक, कॉलेज प्रोफेसर और विभिन्न संगठनों के शिक्षक इस प्रदर्शन में समर्थन के लिए शामिल होंगे, जिससे निर्वाचन आयोग पर तत्काल हस्तक्षेप के लिये दबाव डाला जा सके।
4 नवंबर से शुरू हुआ है SIR: एसआईआर के तहत घर-घर जाकर गणना का कार्य चार नवंबर को शुरू हुआ और यह चार दिसंबर तक जारी रहेगा, तथा मसौदा नामावलियां नौ दिसंबर को प्रकाशित की जाएंगी। समिति ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई या सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वह निरंतर विरोध कार्यक्रम शुरू करेगी। इस बीच, एक अन्य संगठन, बीएलओ ओइक्या मंच ने गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण से संबंधित मुद्दों को अलग से उठाया और अतिरिक्त सहायक कर्मचारियों की मांग की।
आयोग को मिला BLOs की मांगे, पर साधी चुप्पी
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दोनों बीएलओ संगठनों की मांगें सीईओ कार्यालय को प्राप्त हो गई हैं, लेकिन उन्होंने उनके आंदोलन पर कोई टिप्पणी नहीं की। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, टीएमसी के राज्यसभा सदस्य गोखले ने कहा कि हालांकि पार्टी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में नहीं है, लेकिन वह पश्चिम बंगाल में इस अभ्यास को “जल्दबाजी, अव्यवस्थित और अपारदर्शी तरीके” से किए जाने का कड़ा विरोध करती है। गोखले ने कहा, “क्या एसआईआर करने के लिए क्रूरता जरूरी है? बंगाल और पूरे भारत में, एसआईआर का काम करने वाले बीएलओ या तो थककर मर रहे हैं या आत्महत्या कर रहे हैं। जिस प्रक्रिया के लिए कुछ महीने का समय दिया जाना चाहिए, उसे जल्दबाजी में 30 दिनों में पूरा किया जा रहा है। टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इसको लेकर 24000 कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की है। “बैठक में टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि एसआईआर का मुद्दा कानूनी तौर पर है और वे इसे उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को वह संसद सत्र में भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि टीएमसी पिछली बार भी चाहती थी कि इस पर चर्चा हो लेकिन भाजपा ने इसकी इजाजत नहीं दी।
उन्होंने सभी विधायकों को निर्देश दिया है कि अगले 10 दिनों तक बीएलए से फोन पर या उनके घर पर संपर्क करें और उन्हें सक्रिय रहने के लिए कहें तथा वीडियो कॉल पर उन्हें प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही बीएलओ की भूमिका और लोगों की प्रतिक्रिया पर फीडबैक लेने के लिए भी कहा है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा सांसद बीईआरएस और टीईआरएस को फोन करेंगे और उन्हें प्रोत्साहित करेंगे। यह प्रक्रिया 7 दिनों तक जारी रहेगी। हर 15 दिन में चेयरपर्सन ममता बनर्जी को एक रिपोर्ट भेजी जाती है। इस कार्य के लिए सांसदों और विधायकों की भूमिका के बारे में टीएमसी 6 तारीख को एक रिपोर्ट सौंपेगी। बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी एसआईआर का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि एसआईआर को हड़बड़ी में कराया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इसे फिलहाल रोकने की मांग की थी। पत्र में ममता बनर्जी ने लिखा था कि राज्य में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य बेहद चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। यह अभियान अनियोजित और खतरनाक तरीके से चलाया जा रहा है, जिससे पहले दिन से ही व्यवस्था चरमरा गई है।ममता बनर्जी ने लिखा, “जिस तरह से यह प्रक्रिया अधिकारियों और नागरिकों पर थोपी जा रही है, वह न केवल अनियोजित और अव्यवस्थित है, बल्कि खतरनाक भी है।” उन्होंने आगे कहा कि बुनियादी तैयारी, पर्याप्त योजना या स्पष्ट संचार के अभाव ने इस प्रक्रिया को अव्यवस्थित कर दिया है।

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