कारगिल योद्धा तपन कुमार घोष राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, सीमा सुरक्षा में बिताए 39 साल
अजित प्रसाद,बशीरहाट(पश्चिम बंगाल): उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है। बशीरहाट नगरपालिका के वार्ड नंबर 18, दासपाड़ा के निवासी और पूर्व बीएसएफ (BSF) इंस्पेक्टर तपन कुमार घोष को उनकी अटूट देशभक्ति, ईमानदारी और निष्ठा के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
अभावों के बीच पली देशभक्ति: एक अत्यंत निर्धन परिवार में जन्मे तपन घोष के पिता, संतोष घोष, लकड़ी की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। तपन ने बचपन से ही देश सेवा का सपना देखा था। 1985 में उन्होंने बीएसएफ में एक कांस्टेबल के रूप में अपना सफर शुरू किया। अपनी कड़ी मेहनत और काबिलियत के दम पर वे इंस्पेक्टर के पद तक पहुँचे।
कारगिल युद्ध और सीमाओं की सुरक्षा: अपने 39 साल के लंबे करियर में उन्होंने देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सीमाओं पर अपनी सेवा दी। वे तीन बार कश्मीर के एलओसी (LOC) पर तैनात रहे और पंजाब सीमा पर भी पहरा दिया। सबसे गौरवशाली बात यह है कि उन्होंने कारगिल युद्ध में एक सैनिक के रूप में अग्रिम पंक्ति में रहकर दुश्मन का मुकाबला किया।
सम्मान और उपलब्धि:
पदभार: 39 साल के करियर में उनकी ईमानदारी के कारण 6 बार पदोन्नति हुई।
प्रशिक्षण: उन्होंने अनगिनत नए रंगरूटों को देश रक्षा और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया।
पुरस्कार: 31 जनवरी 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद, हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा घोषित सम्मान प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उनके हाथों में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने सौंपा।
भावुक हुआ परिवार: तपन बाबू की इस उपलब्धि पर उनकी माता उमा घोष और पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। हालांकि, उनके पिता इस ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए जीवित नहीं हैं, लेकिन गाँव का हर नागरिक उन्हें अपना आदर्श मान रहा है।
युवाओं को संदेश: पुरस्कार ग्रहण करने के बाद तपन कुमार घोष ने कहा, “सभी को देश रक्षा के काम में आगे आना चाहिए। ईमानदारी, निष्ठा और अच्छे इंसान के रूप में समाज की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। हर युवा को देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होना चाहिए।”




