राजधानी में पार्किंग को लेकर गंभीर संकट
-सड़कों पर पार्किंग से लगता है जाम
-जाम के कारण समय पर पहुंचना मुश्किल
हरप्रीत भट्टी
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की बेतहासा हुजूम और जाम से लोगों का समय पर कहीं पहुंचना मुश्किल होता जा रहा है। घंटों जाम में फंसे रहना सामान्य व्यवस्था मान ली गई है। इस ओर सरकार और प्रशासन का ध्यान ही नहीं है। दरअसल, राजधानी में वाहनों की संख्या में बेतहाशा इजाफा होता जा रहा है। वाहन कंपनियां स्पर्धा की होड़ में एक से एक वाहन बाजार में ला रही हैं, अच्छी बात है, पर सवाल यह है कि उसके चलने के लिए सड़कों को होना आवश्यक है जिस पर प्रशासन द्वारा समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की संख्या लाखों में है, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था संख्या के अनुपात में नाकाफी है। यहां के मार्केटों में सड़कों, गलियों, पार्कों और खाली सार्वजनिक जगहों पर वाहनों का जमघट लगा रहता है। फुटपाथ तक को लोगों ने पार्किंग स्थल बना दिया है। पैदल चलने वालों को भी मुश्किल पैदा कर दिया है। पैदल पथ पर बाइक वालों ने कब्जा कर रखा है। पैदल यात्री बमुश्किल सफर कर पाते हैं। दिल्ली का कनॉट प्लेस, लाल किला, चांदनी चौक, सदर बाजार, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, एम्स, सरोजनी नगर, आजादपुर, कशमिरी गेट, पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार, आनंद विहार, शाहदरा आदि जगहों वाहनों के रेलमपेल से बेहद परेशानी होती है।
यातायात वाली सड़कों पर भी वाहनों को कतार में पार्किंग कर दिया जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्किंग की सरकार द्वारा कोई रोडमेप नहीं बनाया गया है। दिल्ली की कई सड़कों पर ही दिल्ली नगर निगम द्वारा वैध-अवैध पार्किंग का ठेका दिया गया है। सूत्र बताता है कि दिल्ली की सड़कों पर निगम का बोर्ड लगा कर पार्किंग का फर्जी खेल लाखों में होता है। वाहनों से प्राप्त राशि सरकारी खजाने के बजाय विभागों के अधिकारियों में बंदरबांट हो जाती है। पार्किंग के अवैध कारोबार में निगम, टैफिक पुलिस और स्थानीय छुटभैये नेता व दबंग शामिल हैं। यह कारोबार पूरे दिल्ली में मिल जाएगा। ऐसी कोई जगह नहीं बची है जहां अवैध पार्किंग का कारोबार नहीं होता है।
कई बार अवैध पार्किंग को लेकर वाहन चालकों और पार्किंग एजेंटों के बीच खूब झगड़े होते हैं। मारपीट की नौबत आने पर स्थानीय बीट पुलिस पैसे लेकर मामला को रफादफा कर देती है। अवैध पार्किंग के कारोबार को पुलिस का संरक्षण प्राप्त होता है। ऐसी समस्या से प्रशासन और जनप्रतिनिधि वाकिफ हैं, लेकिन उनके समाधान की पहल नहीं करते हैं। दिल्ली पर बढ़ते वाहनों के दबाव को कम करने के लिए बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगानी होगी। सड़कों को और चौड़ा करना होगा। टैफिक व्यवस्था और पुलिसकर्मी को चुस्त-दुरुस्त करना होगा। साथ ही यहां के नागरिकों को भी प्रशासन को साथ देना होगा।

