मौसम: बिहार में जाड़े के मौसम में ठंड का जारी प्रकोप
राजीव कुमार झा
बिहार का ज्यादातर हिस्सा मैदानी है और यहां के तमाम इलाकों में नदी नालों की भी बहुलता है जिसकी वजह से बिहार में खूब ठंड पड़ती है।
बिहार हिमालय के पूर्वोत्तर भूभाग के भी निकट है और इस क्षेत्र की ठंडी बर्फीली हवाओं से दिसंबर के मध्य से लेकर जनवरी के मध्य तक बिहार में ठंड का प्रकोप व्यापक हो जाता है और गहन कुहासे से यहां जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। बच्चों के स्कूल बंद कर दिए जाते हैं और सड़कों पर भी यातायात अवरोध पैदा हो जाता है। बिहार में जाड़े के मौसम में चना , मसूर
मटर और सरसों की फसलों से खेत खलिहानों में हरियाली छायी रहती है। यहां सरकार के द्वारा जाड़े के मौसम में गरीबों को कंबल बंटवारा जाता है और चौराहों पर अलाव जलवाए जाते हैं। ठंड से बचाव के लिए सरकार
अस्थायी आश्रयगृहों की स्थापना भी करती है। जाड़े के मौसम में धूप सेंकना बिहार के लोगों को अत्यंत प्रिय है और यहां राजगीर बोधगया, वैशाली, नालंदा, पावापुरी के अलावा अन्य जगहों पर भी पर्यटकों की भीड़ भाड़ सबका ध्यान आकृष्ट करती है
मकर संक्रांति बिहार में जाड़े के मौसम का सबसे बड़ा त्योहार है और इस मौके पर लोग दही चूड़ा और तिलवा तिलकुट का उपहार सगे संबंधियों के यहां भिजवाते हैं और इस दिन नदी की पवित्र धारा में लोग स्नान करते हैं। बिहार में जाड़े का मौसम सबसे सुंदर माना जाता है। जाड़े के मौसम में चूड़ा और गुड़ का सेवन बिहार के गांवों में लोग खूब प्रेम पूर्वक करते हैं।


