” मैं समय हूँ ” काव्य -संग्रह का विमोचन व पुस्तक चर्चा!

आयोजन: साहित्य संस्कृति

 

राजीव कुमार झा

साहित्यिक आयोजन हमारे जीवन में सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देते हैं और इनके माध्यम से मनुष्य को चिंतन मनन में शरीक होने का अवसर मिलता है।

हाल में पंजाब के फगवाड़ा में डॉ मनोज प्रीत के कुशल प्रबंधन में प्रीत साहित्य सदन में दिलीप कुमार पाण्डेय द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘मैं समय हूँ ‘ काव्य संग्रह का विधिवत विमोचन किया गया।
प्रीत साहित्य सदन में मां सरस्वती के दीप प्रज्वलन के पश्चात कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ अनु शर्मा कौल और डॉ मनोज प्रीत ने संयुक्त रूप से किया। डॉ मनोज प्रीत ने उक्त संग्रह और कवि का परिचय देते हुए पुस्तक की महत्वपूर्ण अंशों को रेखांकित किया। डॉ अनु शर्मा कौल जी ने विस्तार से प्रपत्र पत्र पढ़ा उन्होंने अपने संबोधन में कविता ‘बस मुझे चलने दो ‘ एक सामान्य व्यक्ति की चीत्कार है जो बस जीवन पथ पर बिना किसी अपेक्षा और उपेक्षा के चलना चाहता है। समष्टि का प्रतीक मनुष्य व्यष्टि बोध कह उठता है।
मुझे भूख नहीं/मुझे होड़ नहीं/मुझे सामान्य रहने दो/मैं किसी पार्टी का/किसी समारोह का/ना समर्थक हूं/ना विरोधी हूं/मुझे झंडों से दूर रखो/मुझे सिर्फ अपनी यात्रा तय करने दो।
अंत में उन्होंने कहा कि दिलीप कुमार पाण्डेय की कविता गहरे अवसाद से उपजे मौन की कविता है, उसमें पीड़ा भी है, संत्रास भी।
इस अवसर पर डॉ अनु शर्मा, दिलीप अवध, डॉ संजीव डाबर, डॉ मनोज , डॉ जवाहर धीर प्रीत, दिलीप कुमार पाण्डेय, डॉ यश चोपड़ा, रमा प्रीत, ममता जैन, तरनजीत सिंह, मनवीर धीमान,शरीफ अहमद आदि मौजूद थे।

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