वैश्विक तनाव: ईरान – अमरीका युद्ध

होली की खुशियों के बीच

 

राजीव कुमार झा

फागुन की मस्ती और इसके उल्लास उमंग के बीच देश की राजनीति नयी करवट लेती दिखाई दे रही है। दिल्ली में कोर्ट ने आम आदमी के नेताओं को शराब माफियाओं से धन उगाही के आरोपों से बरी करके भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। आगे इन स्थितियों में भाजपा को पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में जनता को इसका जवाब देना होगा।
भाजपा अभी लोकप्रियता के उफान पर है लेकिन ईरान अमरीका युद्ध के बीच उसे देश के पक्ष को तय करने में मुश्किल से गुजरना पड़ेगा। ईरान ने हर मुसीबत में भारत का साथ दिया। इस्लामिक देशों में ईरान अपनी कट्टरपंथी छवि के बावजूद दुनिया के तमाम देशों की स्वतंत्रता और गरिमा को जानने समझने वाला अकेला देश है। शीतयुद्ध खत्म होने के बाद दुनिया की राजनीति में अमरीका का वर्चस्व आज भी उसकी सैनिक सबलता और उसके दुरूपयोग पर आधारित रहा है। इसकी शह पर पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों से कश्मीर में हमारे देश को तबाह कर रखा है। अमरीका के लिए संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों का कोई महत्व नहीं है। फिलहाल भारत ने पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा को बिल्कुल बंद कर रखा है और इसे कश्मीर समस्या के स्थाई समाधान के रूप में भी देखा जाना चाहिए। सरकार को कश्मीर सीमा पर कंटीले तारों से घेराबंदी करने में भी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यहां पाकिस्तान के साथ हमारे देश की सीमा नियंत्रण रेखा के रूप में संयुक्त राष्ट्र की देखरेख के अंतर्गत आने वाले इलाके के रूप में जानी जाती है। ईरान को अमरीका आतंकवादी देश कह रहा है लेकिन इसका कोई मतलब नहीं है। अमरीका अब अंतरराष्ट्रीय अपनी सैन्य कार्रवाई से दुनिया में आतंकवाद
फैला रहा है। परमाणु हथियार बनाने पर यूरोप के देश अपना नियंत्रण और वर्चस्व कायम रखना चाहते हैं और परमाणु विस्फोट करने की दशा में भारत के विरुद्ध भी कार्रवाई की है। सचमुच यह एक जटिल स्थिति है। यह सबसे अच्छा होगा कि सारी दुनिया में परमाणु हथियार निष्क्रिय कर दिए जाएं और परमाणु हथियारों को लेकर आपसी लड़ाई से दुनिया के देश विध्वंस और बर्बादी से बचकर विश्व शांति को कायम करने में जुट जाएं। ईरान को अमरीका ने भारी नुक़सान पहुंचाया है। अमरीका को भी ऐसे नुकसान झेलने पड़ रहे हैं। ईरान ने अमरीका समर्थक पश्चिम एशिया के अनेक देशों पर हमला किया है। चीन और रूस ने उसे मदद का भरोसा दिया है।
आखिर अमरीका ईरान के साथ युद्ध क्यों कर रहा है इसका जवाब दुनिया को देना होगा।

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