पहेला बैसाख (बंगाली नववर्ष ) दक्षिणेश्वर काली मंदिर में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब,
नया 'हलखाता' (बही खाता) पूजन के लिए लगी लंबी कतारें
अजित प्रसाद ,कोलकाता : बंगाली नव वर्ष (पहेला बैसाख) के पावन अवसर पर आज सुबह से ही ऐतिहासिक दक्षिणेश्वर काली मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। नए साल के पहले दिन मां भवतारिणी के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए राज्य के कोने-कोने से हजारों भक्त मंदिर प्रांगण में एकत्रित हुए हैं।व्यवसायी वर्ग में दिखा विशेष उत्साहबंगाली परंपरा के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी ‘हलखाता’ के उपलक्ष्य में व्यापारियों का तांता लगा रहा।नई शुरुआत: बड़ी संख्या में व्यवसायी अपनी नई बही-खातों (लेजर बुक) के साथ मंदिर पहुँचे।लक्ष्मी-गणेश पूजन: व्यापार में उन्नति और समृद्धि की कामना के साथ भक्तों ने माता के चरणों में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं और नए खाते रखकर विशेष पूजा-अर्चना की।
सुरक्षा के कड़े इंतजामजैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, मंदिर परिसर में भीड़ और भी बढ़ती जा रही है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं:भक्तों के लिए अलग से बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है।चिलचिलाती धूप को देखते हुए पीने के पानी और छाया के इंतजाम किए गए हैं।”भोर होने से पहले ही मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खोल दिए गए थे। हर तरफ ‘जय मां काली’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया है।”— मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्यश्रद्धालुओं का मानना है कि साल के पहले दिन मां भवतारिणी का आशीर्वाद लेने से पूरा वर्ष सुखद और मंगलमय व्यतीत होता है। दक्षिणेश्वर के अलावा कालीघाट और तारापीठ जैसे सिद्धपीठों में भी सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।



