राम रहीम को 16वीं बार मिला 30 दिनों का पैरोल

-सामर्थ्यवान के लिए जेल की सजा एक मजाक

नई दिल्ली। सामर्थ्यवान के लिए न्यायपालिका में अलग व्यवस्था है और सामर्थ्यहीन के लिए अलग। कुछ ऐसा ही देखने को मिलता है। यह बात भी सच है कि जेलों में निर्दोष सालों साल यातनाएं झेलते हैं और दोषी बाहर मजे में रहते हैं। कई कैदी की जिन्दगी जेल में गुजर जाती है और बाद में पता चलता है कि वह निर्दोष था। हमारी न्याय प्रणाली की खामियां उजागर होती हैं। सामर्थ्यवान के लिए जेल की सजा का कोई मतलब ही नहीं है। जब चाहा जेल के अंदर, जब चाहा जेल के बाहर। सरकार की मेहबानी होती है। हरियाणा सरकार ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 16वीं बार 30 दिनों की पैरोल मंजूर की है। पैरोल की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार की सुबह राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गया।
जेल से बाहर आते राम रहीम को पंजाब और हरियाणा पुलिस के भारी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। सुरक्षा कारणों और स्थानीय कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, राम रहीम को पुलिस के एक बहुत बड़े और कड़े काफिले के साथ सीधे सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना किया गया।
बताया जा रहा है कि राम रहीम को अब तक 16वीं बार पैरोल या फरलो का फायदा मिला है। इससें पहले 5 फरवरी 2026 को उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। उस दौरान वो सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहा था। पैरोल अवधि पूरी होने के बाद उसे वापस सुनारिया जेल भेज दिया गया था। गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम साल 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं। उसे दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा मिली हुई है। राम रहीम को लगातार पैरोल और फरलो दिए जाने को लेकर हरियाणा सरकार पर विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों पर सवाल भी उठाते रहे हैं। सरकार पर राम रहीम पर मेहरवाणी करने के आरोप भी लगते रहे हैं। वहीं डेरा सच्चा सौदा के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में समर्थक हैं।

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