उत्तर बंगाल के चाय उद्योग में लागू होगा ‘असम मॉडल’,
* उत्तरकन्या की उच्च स्तरीय बैठक में कड़े निर्देश- संसद राजू विष्ट
सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल के बीमार और बंद पड़े चाय बागानों को पुनर्जीवित करने तथा श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए अब असम के सफल मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया गया है। आज सिलीगुड़ी स्थित उत्तर बंगाल के सचिवालय ‘उत्तरकन्या’ में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला हुआ। इसके तहत टी बोर्ड (Tea Board) का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही असम का दौरा करेगा, जो वहां के श्रमिक कल्याण और न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) प्रणाली का गहन अध्ययन करेगा।केंद्रीय बजट के ₹312 करोड़ 9 महीने में खर्च करने का अल्टीमेटमबैठक में चाय श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक विकास को लेकर कई कड़े निर्देश जारी किए गए:समय सीमा तय: चाय श्रमिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा के लिए केंद्रीय बजट में आवंटित ₹312 करोड़ की राशि को आगामी 9 महीनों के भीतर पूरी तरह खर्च करने का निर्देश दिया गया है।बकाया राशि का भुगतान: श्रमिकों के लंबे समय से बकाया बोनस, प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी का तेजी से निपटारा करने पर विशेष जोर दिया गया है।सांसद राजू बिष्ट ने उठाई मांग, ‘टी टूरिज्म’ नीति की होगी समीक्षादार्जीलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने बैठक में शामिल होते हुए श्रमिकों के अधिकारों की पुरजोर वकालत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वित्तीय संकट का बहाना बनाकर श्रमिकों के कानूनी और न्यायसंगत हक को नहीं रोका जा सकता, उनका बकाया जल्द से जल्द चुकाया जाए।बैठक के अन्य मुख्य निर्णय:टी टूरिज्म नीति पर पुनर्विचार: चाय बागानों में लागू ‘टी टूरिज्म’ (चाय पर्यटन) नीति के वास्तविक प्रभावों और उससे श्रमिकों को होने वाले लाभ या नुकसान की समीक्षा की जाएगी।केंद्रीय योजनाओं का लाभ: सभी पात्र चाय श्रमिकों तक केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा।दुर्गा पूजा से पहले बोनस: आगामी दुर्गा पूजा के त्योहार से पहले ही श्रमिकों का बोनस सुनिश्चित करने के लिए अभी से आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है।उत्तरकन्या में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक और असम मॉडल को लागू करने की इस पहल से उत्तर बंगाल के लाखों चाय श्रमिकों में अपने सुनहरे भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।


